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    भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर बनेगा बेली ब्रिज, BRO 7.8 मीटर पीछे से करेगा निर्माण

    Updated: Wed, 06 May 2026 07:43 PM (IST)

    बीआरओ विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से से 7.8 मीटर पीछे बेली ब्रिज का निर्माण करेगी, जिससे अस्थायी मार्ग तैयार होगा। ...और पढ़ें

    भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर बनेगा बेली ब्रिज, बीआरओ 7.8 मीटर पीछे से करेगा निर्माण

    भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर बनेगा बेली ब्रिज, बीआरओ 7.8 मीटर पीछे से करेगा निर्माण

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) क्षतिग्रस्त जगह से 7.8 मीटर पीछे से विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज (गर्डर ब्रिज) बनाएगी। विक्रमशिला सेतु पर अस्थायी मार्ग बनाने की प्रक्रिया में 10 दिन का समय लग सकता है।

    अभियंताओं के साथ बीआरओ की टीम ने बुधवार को दूसरे दिन भी अभियंताओं के साथ सेतु के ऊपरी और अंदुरनी हिस्से की जांच की।

    भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ पुल के ऊपरी और अंदरूनी हिस्सों में अलग-अलग स्थानों पर मशीन से सतह की जांच की गई। जिसमें सामने आया कि क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ दूरी पर पुल का स्ट्रक्चर मजबूत है। तकनीकी आकलन के लिए टीम ने मौके पर मापी भी कराई।

    बीआरओ के अधिकारी के अनुसार क्षतिग्रस्त स्थल से 7.8 मीटर की दूरी से गर्डर पुल यानी अस्थायी मार्ग का निर्माण कराया जाएगा क्योंकि कंपन नहीं हो। जांच रिपोर्ट के आधार पर डिजाइन तैयार होगा। इसके बाद निर्माण की दिशा में पहल की जाएगी। सिलीगुड़ी या कोलकाता से उपकरण मंगाए जाएंगे।

    सामग्रियों के पहुंचने में दो-तीन दिन का समय लग सकता है। वैकल्पिक मार्ग बनाने में 10 दिन का समय लग सकता है। इस पर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही बीआरओ के अधिकारियों ने बताया कि स्लैब के अंदरूनी हिस्से (बाकश) का बीम काफी मजबूत है।

    उसी बीम के ऊपर से गर्डर ब्रिज का काम शुरू होगा। यह काम पुल के दोनों हिस्सों में होगा। जिस तरह सेना दुर्गम और आपदा प्रभावित इलाकों में अस्थायी पुल और वैकल्पिक रास्ते तैयार करती है, उसी तर्ज पर विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर भी अस्थायी मार्ग बनाया जा सकता है, लेकिन वैकल्पिक मार्ग पर छोटे वाहन चलेंगे।

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    अधिकारियों ने बताया निर्णय के बाद ही डिजाइन तैयार किया जाएगा कि कितने क्षमता वजन के वाहनों का इस पर संचालन किया जाएगा। इधर, यदि यह योजना लागू होती है तो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवाजाही काफी हद तक बहाल हो सकती है।

    इस पुल के माध्यम से खगड़िया, सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार और बांका जैसे जिलों के अलावा झारखंड के कई क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, इसलिए कि सेतु का एक हिस्सा गिर कर गंगा में समा गया है और नवगछिया-भागलपुर के बीच संपर्क पूरी तरह से कट गया। आवागमन बाधित है।

    एनएच (साउथ) विंग बिहार के चीफ इंजीनियर संजय भारती ने बताया कि टीम मौके पर पहुंचकर विस्तृत जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। यदि तकनीकी रूप से अनुमति मिलती है, तो आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

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