उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु बंद, पाकुड़ के पत्थर कारोबार पर गहरा असर
विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने और बंद होने से पाकुड़ के पत्थर व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ा है। पुल बंद होने से परिवहन लागत और समय बढ़ गया है, जिससे ...और पढ़ें

उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला विक्रमशिला सेतु बंद
HighLights
विक्रमशिला सेतु बंद होने से पाकुड़ का पत्थर व्यवसाय प्रभावित।
परिवहन लागत और समय में 150 किलोमीटर की वृद्धि।
पाकुड़ के 70% पत्थर कारोबार पर सीधा असर।
जागरण संवाददाता, पाकुड़। बिहार के भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने के बाद पूरी तरह बंद कर दिया गया है। हाल ही में पुल का एक बड़ा स्लैब गंगा में गिरने के बाद प्रशासन ने एहतियातन दोनों ओर से यातायात रोक दिया।
यह सेतु उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा मानी जाती है, जहां से प्रतिदिन हजारों वाहन गुजरते थे।
पुल बंद होने के बाद अब वाहनों को मुंगेर के रास्ते डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे दूरी और समय दोनों में काफी बढ़ोतरी हो गई है। इसका सीधा असर झारखंड के पाकुड़ जिले के पत्थर व्यवसाय पर पड़ा है।
जिले के महेशपुर, रद्दीपुर, हिरणपुर, पाकुड़िया एवं पाकुड़ क्षेत्र के विभिन्न खनन इलाकों से प्रतिदिन लगभग 250 से 300 ट्रक पत्थर बिहार के खगड़िया, नौगछिया, सहरसा सहित अन्य जिलों में भेजे जाते थे। इनमें कुछ वाहन बिहार से आते थे, तो कुछ झारखंड के स्थानीय वाहन होते थे।
हिरणपुर क्षेत्र के क्रशरों से भी रोजाना सैकड़ों वाहन गोड्डा के रास्ते बिहार के लिए रवाना होते थे, लेकिन पुल बंद होने के बाद इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है।
अब कई वाहन वैकल्पिक मार्ग के रूप में पश्चिम बंगाल के धुलियान होते हुए मुंगेर के रास्ते बिहार पहुंच रहे हैं। इस दौरान उन्हें लगभग 140 से 150 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे परिवहन लागत और समय दोनों बढ़ गए हैं।
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व्यवसायियों का कहना है कि लंबी दूरी और देरी के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। खनिज परिवहन के लिए निर्धारित चालान की समय-सीमा के कारण वाहन चालकों को भी परेशानी हो रही है। पुल बंद होने का असर यह हुआ है कि खनन क्षेत्रों में सन्नाटा पसर गया है और क्रशरों में इक्का-दुक्का वाहनों की ही लोडिंग हो रही है।
कारोबारियों का मानना है कि वैकल्पिक मार्ग से माल ढुलाई महंगी हो जाएगी, जिससे व्यापार पर और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, पश्चिम बंगाल की बदली परिस्थितियां भी कारोबारियों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
क्या कहते हैं पत्थर व्यवसायी?
पाकुड़ के पत्थर व्यवसायी लुत्फल हक ने बताया कि बिहार ही यहां के पत्थर का बड़ा मंडी है। विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद से तो लोडिंग ही बंद है।पुल के कारण यहां का 70 फीसद काम प्रभावित हो जाएगा।