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चैत्र नवरात्रि 2026: डोली पर आएंगी देवी दुर्गा, जानें शुभ मुर्हूत और कलश स्थापना का समय, अभिजीत मुर्हूत को भी समझें

Published: Tue, 10 Mar 2026 01:10 PM (GMT+05:30)

चैत्र नवरात्रि 2026 : इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, जो 19 से 27 मार्च तक मनाई जाएगी। इस वर्ष देवी ...और पढ़ें

चैत्र नवरात्रि 2026 : देवी का आगमन और कलश स्थापना समय-बद्ध तरीके से होने से शक्ति का संचार अधिक होता है।

चैत्र नवरात्रि 2026 : देवी का आगमन और कलश स्थापना समय-बद्ध तरीके से होने से शक्ति का संचार अधिक होता है।

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जागरण संवाददाता, भागलपुर।  चैत्र नवरात्रि 2026 : वसंत ऋतु की मधुर बयार और चैत्र मास के आगमन के साथ ही शहर का वातावरण भक्तिमय होने लगा है। मंदिरों की घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और जय माता दी के जयकारों से पूरा शहर आस्था के रंग में रंगने की तैयारी में है। इसी पावन माहौल में चैत्र नवरात्रि का पर्व इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।

नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु उपवास, जप, पाठ और पूजा के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करेंगे। शहर के प्रमुख मंदिरों में दुर्गा सप्तशती पाठ, भजन-कीर्तन, हवन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। इसे लेकर मंदिर समितियों और श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल है।

मंदिरों में तैयारियां तेज

चैत्र नवरात्रि को लेकर शहर के मंदिरों और पूजा समितियों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंदिर परिसरों की साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और सजावट का कार्य शुरू हो गया है। विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जा रही है।

पूजा समितियों की ओर से लगातार बैठक कर नवरात्रि आयोजन को लेकर अंतिम तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसरों में व्यवस्था दुरुस्त की जा रही है, ताकि पूजा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कलश स्थापना के साथ होगी शुरुआत

नवरात्रि की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन कलश स्थापना के साथ होगी। इस दिन श्रद्धालु अपने घरों और मंदिरों में कलश स्थापित कर मां दुर्गा का आवाहन करेंगे। नौ दिनों तक मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाएगी।

तिलका मांझी महावीर मंदिर के पंडित आनंद झा के अनुसार पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ नवरात्रि का आरंभ होगा। इसके बाद क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि और महागौरी की पूजा की जाएगी।

नवरात्रि के नौवें दिन नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ इस पर्व का समापन होगा। इसी दिन रामनवमी का पर्व भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

चार नवरात्रियों का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष में कुल चार नवरात्रि होती हैं। इनमें दो गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि शामिल हैं। चैत्र नवरात्रि को विशेष रूप से शक्ति साधना और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है।

इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार को हो रही है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जब नवरात्रि का आरंभ गुरुवार या शुक्रवार को होता है, तब मां दुर्गा का आगमन डोली पर माना जाता है। इसे शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

कलश स्थापना के लिए इस बार दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। पहला चौघड़िया मुहूर्त सुबह 6:53 बजे से 7:56 बजे तक रहेगा। दूसरा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक निर्धारित है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में कलश स्थापना करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार दिनभर में किसी भी समय श्रद्धा और विधि-विधान से कलश स्थापना कर सकते हैं।

कन्या पूजन की अनूठी परंपरा

चैत्र नवरात्रि के दौरान तिलका मांझी महावीर मंदिर में एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होती है। यहां नौ दिनों तक प्रतिदिन कुंवारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।

इस परंपरा की खास बात यह है कि कन्याओं की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जाती है। पहले दिन एक कन्या का पूजन किया जाता है, दूसरे दिन दो, तीसरे दिन तीन और इसी क्रम में नवमी के दिन नौ कन्याओं का पूजन होता है।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार यह परंपरा शक्ति की निरंतर वृद्धि और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और इस परंपरा में सहभागी बनते हैं।

नवरात्रि के इन नौ दिनों में पूरा शहर भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहता है। मंदिरों में सुबह से देर रात तक पूजा, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह और भी बढ़ जाता है।

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