अब बिना DAC के नहीं मिलेगा सिलिंडर, कालाबाजारी रोकने के लिए LPG कंपनियों के सख्त नियम
रसोई गैस कंपनियों ने सिलिंडर आपूर्ति के लिए डिजिटल अथेंटिकेशन कोड (DAC) को शत-प्रतिशत अनिवार्य कर दिया है। इससे अब बिना वैध कनेक्शन के सिलिंडर नहीं मि ...और पढ़ें

LPG सिलिंडर की सप्लाई। फोटो पीटीआई

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, भागलपुर। रसोई गैस आपूर्ति में लंबे समय से चल रहे जुगाड़ तंत्र पर अब कंपनियों ने कड़ा प्रहार किया है। डिजिटल अथेंटिकेशन कोड (DAC) को शत-प्रतिशत अनिवार्य करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना कोड के एक भी सिलिंडर निर्गत नहीं होगा। इससे वर्षों से गैर-कनेक्शनधारकों को मिल रही सुविधा पर अचानक विराम लग गया है और वितरकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
जुगाड़ व्यवस्था पर कसा शिकंजा
अब तक वीआईपी, जनप्रतिनिधि, अधिकारी और पुलिसकर्मियों समेत कई प्रभावशाली लोग बिना वैध कनेक्शन जुगाड़ के जरिए गैस सिलिंडर प्राप्त करते रहे हैं।
कंपनियों की सख्ती के बाद वितरक ऐसे उपभोक्ताओं से कतराने लगे हैं। स्पष्ट निर्देश है कि डीएसी के बिना आपूर्ति करने पर भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
वितरकों की दोहरी परेशानी
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि यदि प्रभावशाली लोगों को सिलिंडर नहीं दिया जाए तो संबंध बिगड़ने का खतरा है, और यदि दे दिया जाए तो कंपनी की कार्रवाई तय है। इस द्वंद्व ने वितरकों को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है।
सामाजिक दबाव और यहीं व्यवसाय करने के कारण वे खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि ऐसी डिमांड अभी भी हो रही है और वितरक अब आपूर्ति करने में कतरा रहे हैं।
स्थानांतरण के कारण नहीं कराते कनेक्शन
जिले के अधिकांश वरिष्ठ व कनिष्ठ अधिकारियों के नाम से गैस कनेक्शन नहीं है। लगातार तबादले के कारण वे कनेक्शन लेने से बचते हैं।
ऐसे में उनके आवासों पर गैस आपूर्ति की जिम्मेदारी आपूर्ति विभाग पर रहती है। मांग आने पर बिना कनेक्शन नंबर के ही सिलिंडर भेजे जाते रहे हैं, जो अब सख्त नियमों के कारण असंभव जैसा हो गया है।
पहले ऐसे थी जुगाड़ की सुविधा
वितरकों को कंपनी बगैर डीएसी के ही सिलिंडर उपलब्ध करा देती थी, फिर 80 प्रतिशत से शुरू हुई यह अनिवार्यता क्रमशः 85, 95 और अब 100 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इससे जुगाड़ की गुंजाइश समाप्त हो गई। कई वैध उपभोक्ता भी DAC समय पर नहीं मिलने से परेशान हैं। इससे उपभोक्ताओं की कठिनाई और भी बढ़ गई है।
प्रतिदिन होती सिलिंडरों की अनौपचारिक आपूर्ति
जिले के ग्रामीण और शहर के वितरकों द्वारा एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक दिन लगभग 15-20 सिलिंडर ऐसे उपभोक्ताओं को दिए जाते रहे हैं, जिनके पास वैध कनेक्शन नहीं है। इनमें से अधिकांश मामलों में भुगतान भी समय पर नहीं होता, फिर भी सामाजिक प्रतिष्ठा के दबाव में आपूर्ति जारी रहती है।
कंपनियों की निगरानी और जुर्माने की तैयारी
गैस कंपनियां अब एजेंसियों पर पूर्ण नियंत्रण की दिशा में आगे बढ़ चुकी हैं। अधिकारियों द्वारा गोदामों का निरीक्षण कर स्टाक की जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर भारी जुर्माने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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संकट के बीच कड़ा अनुशासन
रसोई गैस संकट आंशिक रूप से कम होते ही कंपनियों ने अनुशासनात्मक शिकंजा कस दिया है। डीएसी की शत-प्रतिशत अनिवार्यता ने जहां पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की है, वहीं जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था वितरकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए गले की फांस बनती जा रही है।