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    Bhagalpur News: पुल हादसे के बाद गंगा में 25 साल बाद ट्रैफिक लोड, हर घंटे पार कर रहे 2200 से अधिक यात्री

    Updated: Thu, 07 May 2026 05:30 AM (IST)

    विक्रमशिला पुल के ध्वस्त होने के बाद गंगा नदी पर 25 साल बाद यातायात का भार कई गुना बढ़ गया है, जिससे हर घंटे 2200 से अधिक यात्री नदी पार कर रहे हैं। ...और पढ़ें

    पुल हादसे के बाद गंगा में 25 साल बाद ट्रैफिक लोड, हर घंटे पार कर रहे 2200 से अधिक यात्री

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला पुल के स्लैब के ध्वस्त होने के बाद से गंगा नदी ही आवागमन का मुख्य और इकलौता जरिया बन गया है। लिहाजा, नदी में 25 साल बाद अचानक ट्रैफिक लोड कई गुणा बढ गया है। हालात यह है कि एक तरफ से हर घंटे 20 से अधिक नाव और जहाज का संचालन हो रहा है। जिससे 2200 से अधिक यात्री गंगा पार आ-जा रहे हैं।

    जहाज से पार करने में 55 से 65 मिनट, जबकि नाव से 30 से 35 मिनट का समय लग रहा है। अभी दोनों ओर से लगभग 30 निजी, 12 सरकारी नाव और दो जहाज का संचालन हो रहा है।

    सुबह से ही यात्रियों की भीड़

    बुधवार को बरारी पुल घाट पर सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ी रही। सुबह 7:20 बजे बरारी घाट से पहला जहाज खुला, जो 9:45 बजे वापस भागलपुर लौटा। इस दौरान घाट पर दोनों ओर यात्रियों की भीड़ बेकाबू दिखी। जहाज लगते ही लोग दौड़कर चढ़ने लगे।

    पुलिस के समझाने के बावजूद बाइक सवार जबरन जहाज पर चढ़ गए, जिससे अफरातफरी की स्थिति बन गई। प्रशासन ने जहाज की क्षमता 200 यात्रियों तक निर्धारित की है, लेकिन सुबह के समय एक जहाज पर 300 से 400 लोग सवार हो गए। नवगछिया की ओर से लौटते वक्त भी यही स्थिति रही।

    दहियारों की मनमानी से आम लोगों को परेशानी

    पुलिस ने दूध लेकर आने वाले दहियारों को रोकने की कोशिश की, लेकिन वे जबरदस्ती चढ़ने पर अड़े रहे, जिससे चढ़ने-उतरने के दौरान जाम जैसी स्थिति बनती रही। भीषण गर्मी के बीच यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। जहाज पर पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बुजुर्गों और बच्चों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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    लगातार हो रही मॉनिटरिंग

    बरारी पुल गंगा घाट से बाबूपुर मुहाने तक एसडीआरएफ के जवान लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई ओवरलोड नाव मुख्य धारा में न जाए। इधर, दोनों ओर आपदा विभाग और पुलिस प्रशासन नावों की क्षमता पर नजर बनाए हुए है।

    नाव की क्षमता के हिसाब से यात्री होते ही नाव खुलवाने का काम किया जा रहा है। नवगछिया की ओर माईकिंग भी की गई है कि जो भी निजी नाव चालाक हैं, अपने पास यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट जरूर रखें। अगर किसी भी प्रकार की घटना होती है तो इसके जिम्मेदार निजी नाव संचालक होंगे और उन पर कार्रवाई होगी।

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