लान्ग कोविड : JLNMCH भागलपुर में 4800 में से 1000 मरीजों की रीढ़ की हड्डी में मिले कोरोना के अवशेष, एंटीबायोटिक फेल
भागलपुर के JLNMCH में हुए शोध में 4800 में से 1000 मरीजों में लॉन्ग कोविड के लक्षण मिले हैं, जिनके शरीर में कोरोना वायरस के अवशेष पाए गए हैं। इन मरीजो ...और पढ़ें

भागलपुर में बड़ा मेडिकल खुलासा: 1 हजार से अधिक मरीजों में मिले लान्ग कोविड के लक्षण
HighLights
JLNMCH शोध: 1000 मरीजों में मिले कोरोना वायरस के अवशेष।
निष्क्रिय वायरस दिल, फेफड़े और रीढ़ की हड्डी में छिपा।
सामान्य दवाएं बेअसर, अतिरिक्त बूस्टर वैक्सीन की आवश्यकता।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (JLNMCH) के मेडिसिन विभाग में पिछले तीन महीनों के दौरान आने वाले मरीजों पर एक बेहद चौंकाने वाला शोध किया गया है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने उन मरीजों पर गहन अध्ययन किया, जो लंबे समय से गंभीर बुखार, सर्दी और खांसी से पीड़ित थे तथा दवा से भी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो रहे थे।
शरीर में मिले कोरोना अवशेष
मेडिकल रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा करते हुए डॉक्टरों ने दावा किया है कि इन सभी रहस्यमयी मरीजों के शरीर में अभी भी कोरोना वायरस के खतरनाक अवशेष मौजूद हैं। चिकित्सकों के अनुसार, यह निष्क्रिय वायरस इंसानी शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अंगों के अंदरूनी ऊतकों (टीश्यूज) से बहुत ही मजबूती के साथ चिपका रह सकता है।
एक हजार से ज्यादा मरीज
अस्पताल के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी के नेतृत्व में अप्रैल, मई और जून के दौरान इलाज के लिए पहुंचे 4,800 मरीजों का विस्तृत परीक्षण किया गया। इस बड़े क्लीनिकल टेस्ट के दौरान एक हजार से अधिक गंभीर मरीजों में लान्ग कोविड के एक समान, डराने वाले और काफी जटिल लक्षण पाए गए हैं।
दवाएं भी हो रहीं बेअसर
इन पीड़ित मरीजों का बुखार साधारण दवाओं से जल्दी नहीं उतर रहा था तथा कई लोगों के पैरों में भयानक जकड़न, नसों में तनाव और लगातार कमजोरी देखी गई। हैरानी की बात यह है कि इन मरीजों पर सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का भी कोई असर नहीं हो रहा था और ठीक होने में एक महीने से अधिक समय लगा।
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रीढ़ की हड्डी में वायरस
डॉ. राजकमल चौधरी ने बताया कि यह निष्क्रिय वायरस इंसानी दिल, फेफड़े, पेट की परतों और यहाँ तक कि रीढ़ की हड्डी के आसपास के ऊतकों में छुपा हुआ मिला है। शरीर में छुपकर रहने वाले कोरोना वायरस के ये घातक अवशेष भविष्य में अनुकूल मौसमी परिस्थितियां मिलते ही दोबारा से सक्रिय होकर शरीर को बीमार कर देते हैं।
वैक्सीन लेने वाले भी प्रभावित
इस मेडिकल रिसर्च में यह साफ हुआ है कि लान्ग कोविड का यह खतरनाक असर उन लोगों में भी मिला है जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी और जिन्होंने ली थी। राहत की बात बस इतनी है कि डॉक्टरों के इस पूरे शोध में यह स्थिति फिलहाल जानलेवा नहीं दिखी है, लेकिन यह मरीजों को लंबे समय तक बीमार रखेगी।
अतिरिक्त वैक्सीन की जरूरत
डॉ. चौधरी ने बताया कि वर्तमान में विश्व स्तर पर ऐसी कोई सटीक दवा उपलब्ध नहीं है जो मानव शरीर से वायरस के इन अवशेषों को 100% नष्ट कर सके। लक्षणों की गंभीरता को देखते हुए भविष्य में लान्ग कोविड से बचाव के लिए अतिरिक्त बूस्टर वैक्सीन की आवश्यकता पर सरकार स्तर से विचार किया जा सकता है।