भागलपुर JLNMCH में सर्जरी के लिए नो वेटिंग : मिले 5 नए एनेस्थीसिया डॉक्टर, अब नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में एनेस्थीसिया डॉक्टरों की कमी दूर हो गई है, जिससे मरीजों को सर्जरी के लिए अब लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बिहार सरकार द्वार ...और पढ़ें

भागलपुर JLNMCH में मरीजों का इंतजार खत्म: एनेस्थीसिया विभाग को मिले 5 नए SR, आईसीयू व सर्जरी में होगा फायदा
HighLights
जेएलएनएमसीएच में 5 नए एनेस्थीसिया डॉक्टरों की तैनाती।
सर्जरी के लिए मरीजों का लंबा इंतजार अब खत्म।
आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर की कार्यप्रणाली में सुधार।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) में इलाज कराने वाले हजारों मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है।
सर्जरी के लिए नहीं करना पड़ेगा इंतजार
अस्पताल में लंबे समय से चली आ रही एनेस्थीसिया (Anesthesia) डॉक्टरों की भारी किल्लत अब पूरी तरह से समाप्त हो गई है, जिससे सर्जरी की प्रतीक्षा सूची खत्म हो गई है।
पहले महीनों लटकी रहती थीं सर्जरी
पूर्व में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की कमी के कारण सामान्य और गंभीर मरीजों को अपनी सर्जरी कराने के लिए महीनों तक अस्पताल के चक्कर काटने पड़ते थे।
सरकार ने तैनात किए 5 नए SR
अस्पताल प्रशासन द्वारा स्वास्थ्य विभाग को लगातार किए गए पत्राचार के बाद बिहार सरकार ने एक साथ पांच नए सीनियर रेजिडेंट (SR) डॉक्टरों की तैनाती कर दी है।
डॉक्टरों की कुल संख्या हुई 25
नए डॉक्टरों के योगदान देने के बाद जेएलएनएमसीएच के एनेस्थीसिया विभाग में अब सीनियर और जूनियर डॉक्टरों की कुल संख्या बढ़कर 25 हो गई है।
आईसीयू के मरीजों को भी लाभ
एनेस्थीसिया विभाग में चिकित्सकों की नफरी बढ़ने से केवल शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) ही नहीं, बल्कि आईसीयू (ICU) में भर्ती गंभीर मरीजों को भी बेहतर देखभाल मिल रही है।
विभाग में बढ़ा डॉक्टरों का कुनबा
फिलहाल विभाग में एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर, तीन सहायक प्राध्यापक, तीन मेडिकल ऑफिसर, पांच एसआर और छह जेआर पूरी मुस्तैदी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डीएनबी कोर्स से मिला बड़ा बल
इसके अतिरिक्त मेडिकल कॉलेज में संचालित डीएनबी (DNB) कोर्स में भी पांच पीजी छात्रों का नामांकन हुआ है, जो एनेस्थीसिया विभाग में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
पहले आधे दर्जन से कम थे डॉक्टर
अस्पताल के पुराने दिनों को याद करें तो पहले एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की संख्या आधा दर्जन (6) भी नहीं थी, जिससे इमरजेंसी और रूटीन ऑपरेशन संभालना बेहद मुश्किल था।
डॉक्टरों और मरीजों में होता था विवाद
डॉक्टरों की कमी के कारण केवल अति-गंभीर मरीजों की ही सर्जरी हो पाती थी, जबकि सामान्य मरीजों को टालना पड़ता था, जिससे अक्सर परिजनों और डॉक्टरों में नोकझोंक होती थी।
2025-28 सत्र के छात्र दे रहे सेवा
मेडिकल कॉलेज में सत्र 2025-28 के चार डीएनबी छात्रों ने पहले दाखिला लिया था, जबकि हाल ही में 2026-28 सत्र के एक और छात्र ने नामांकन कराकर योगदान दिया है।
व्यवस्था में आया व्यापक सुधार
डीएनबी छात्रों के जुड़ने और नए सीनियर रेजिडेंट्स के आने से अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) और आईसीयू वार्ड की कार्यप्रणाली में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।
मरीजों को मिलेगी समय पर चिकित्सा
अब अस्पताल के विभिन्न विभागों से रिकमेंड होने वाले मरीजों को बिना किसी अड़चन और देरी के तय तिथि पर सर्जरी की सुविधा दी जा रही है।