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    PMFME योजना से बदली जीविका दीदियों की तस्वीर, अचार-पापड़ के कारोबार से बन रहीं आत्मनिर्भर

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 08:00 AM (IST)

    प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) भागलपुर की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी मह ...और पढ़ें

    जीविका दीदियां अचार-पापड़ के कारोबार से बन रहीं आत्मनिर्भर (AI Generated Image)

    जीविका दीदियां अचार-पापड़ के कारोबार से बन रहीं आत्मनिर्भर (AI Generated Image)

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    जागरण संवाददाता, भागलपुर। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) भागलपुर की ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बन रही है। जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इस योजना का लाभ लेकर खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े अपने छोटे-छोटे उद्यमों का विस्तार कर रही हैं।

    इससे न केवल उनकी आय बढ़ रही है, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। जिले में इस वित्तीय वर्ष में 640 महिला उद्यमियों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 142 महिलाओं के आवेदन अपलोड किए जा चुके हैं।

    बांस के मुरब्बे, बड़ी, पापड़, मशरूम के अचार से बढ़ा रहीं रोजगार

    कहलगांव प्रखंड के देवरी महेशपुर गांव की रहने वाली शीला देवी इसकी सफल मिसाल हैं। शिवगुरु जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य शीला देवी ने समूह से 75 हजार रुपये का ऋण लेकर खाद्य प्रसंस्करण का काम शुरू किया। बाद में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत उन्हें 40 हजार रुपये की सीड कैपिटल सहायता मिली।

    इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। आज शीला देवी अपने घर से अचार, मुरब्बा, बांस का मुरब्बा, बड़ी, पापड़, मशरूम का अचार, आंवला, लहसुन और मिर्च का अचार सहित विभिन्न प्रकार की दालों एवं राजमा का प्रसंस्करण और विपणन कर रही हैं।

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    उनके इस उद्यम से वर्तमान में 13 जीविका दीदियों को रोजगार भी मिला है, जिससे अन्य महिलाओं की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है। वहीं बिहपुर प्रखंड के बभनगामा पंचायत की सुनीता देवी, जय महादेव जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं।

    उन्होंने समूह से ऋण लेकर दाल-बड़ी और पापड़ बनाने का कार्य शुरू किया। स्थानीय बाजार में उनके उत्पादों की अच्छी मांग है। अब वह आधुनिक मशीनों के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, बेहतर पैकेजिंग करने और बड़े बाजार तक पहुंच बनाने के लिए पीएमएफएमई योजना के तहत आवेदन कर चुकी हैं।

    जिले की 718 महिलाएं ले चुकी हैं योजना का लाभ

    जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक सुनिर्मल गरेन ने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए यह योजना बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

    उन्होंने कहा कि सुनीता देवी की तरह जिले की अनेक महिलाएं भारत सरकार के एनआरएलएम पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर रही हैं। पिछले वित्तीय वर्ष तक जिले की 718 महिला उद्यमियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

    उन्होंने बताया कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को इकाई की स्थापना, विस्तार एवं आधुनिकीकरण के लिए परियोजना लागत पर 35 प्रतिशत तक क्रेडिट-लिंक्ड पूंजी अनुदान दिया जाता है। इसके साथ ही तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्ता सुधार, ब्रांडिंग, आकर्षक पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं।

    वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) की अवधारणा पर आधारित यह योजना स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    जीविका और पीएमएफएमई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से भागलपुर की ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय उद्यमिता को भी नई गति मिल रही है।