'मोदी-शाह का विश्वासपात्र ही बनेगा बिहार का CM', प्रशांत किशोर के बयान से सियासी हलचल तेज
प्रशांत किशोर ने भागलपुर में कहा कि बिहार की राजनीति पर अब मोदी-शाह का प्रभाव बढ़ रहा है और भविष्य का मुख्यमंत्री उन्हीं का विश्वासपात्र होगा। उन्होंन ...और पढ़ें
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भागलपुर पहुंचे प्रशांत किशोर। (फाइल फोटो)
HighLights
बिहार की राजनीति पर मोदी-शाह का प्रभाव बढ़ रहा है।
जनसुराज का लक्ष्य बिहार में स्थायी बदलाव लाना है।
नीतीश कुमार की स्थिति अब कमजोर हो चुकी है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने रविवार को भागलपुर में कार्यकर्ताओं के साथ जनसंवाद करते हुए बिहार की राजनीति पर बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति अब पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रभाव में जाती दिख रही है और भविष्य में वही मुख्यमंत्री बनेगा, जिसे इन दोनों नेताओं का विश्वास पात्र होगा।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि बिहार में वास्तविक और स्थायी बदलाव लाना है।
जमीनी स्तर पर पार्टी के मजबूत करेंगे
उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम के बाद वे मंथन जरूर करेंगे, लेकिन फिलहाल उनका पूरा ध्यान व्यवस्था परिवर्तन और संगठन विस्तार पर है। कार्यकर्ताओं से गांव-गांव तक जनसंपर्क बढ़ाने का आह्वान करते हुए उन्होंने जनसुराज को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि नई सरकार बनने के बाद उसे छह माह का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में वादों पर अमल नहीं हुआ, तो जनसुराज आंदोलन के माध्यम से सरकार को कठघरे में खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक बिहारी, सब पे भारी की कहावत अब कमजोर पड़ गई है और वर्तमान राजनीति में बाहरी प्रभाव हावी हो गया है।
उनकी स्थिति अब कमजोर हो चुकी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी स्थिति अब कमजोर हो चुकी है और वे दबाव में निर्णय लेने को विवश हैं। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि बार-बार बदलते राजनीतिक समीकरणों से यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि वे किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
निशांत कुमार के संभावित मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर भी उन्होंने दोहराया कि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व की इच्छा पर निर्भर करेगा।
पांच राज्यों के आगामी चुनावों को लेकर उन्होंने कहा कि भले ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान, ट्रंप या यूक्रेन जैसे मुद्दों की चर्चा हो, उनका एकमात्र लक्ष्य बिहार है। उन्होंने कहा कि राज्य की सूरत और सीरत बदलने के लिए जनता को भी अपनी सोच बदलनी होगी।
बबूल का पेड़ बोकर आम की अपेक्षा नहीं की जा सकती, कहते हुए उन्होंने मतदाताओं को अल्पकालिक लाभ से ऊपर उठकर दीर्घकालिक भविष्य के बारे में सोचने की नसीहत दी।
ठंडा पड़ सकता है मामला
पटना की नीट छात्रा प्रकरण पर उन्होंने कहा कि वे पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि सीबीआई जांच से मामला ठंडा पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित समुदाय के कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी पीड़ित के पक्ष में अपेक्षित मजबूती से नहीं खड़े हैं।
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प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
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