बिहार के अंग प्रदेश का बढ़ा गौरव : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पहनी मंजूषा चित्रांकित भागलपुरी सिल्क साड़ी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 15 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में मंजूषा कला से सजी भागलपुरी सिल्क साड़ी पहनी, जिसे मनोज कुमार पंडित ने अप्रैल 2026 में भेंट ...और पढ़ें

राष्ट्रपति मुर्मू के मन भाई भागलपुरी सिल्क; 6 महिला कलाकारों द्वारा रची मंजूषा साड़ी पहन बिखेरी चमक
HighLights
राष्ट्रपति मुर्मू ने पहनी मंजूषा चित्रांकित भागलपुरी सिल्क साड़ी।
साड़ी 6 महिला कारीगरों ने दो दिनों में की तैयार।
मंजूषा कला को मिला राष्ट्रीय और वैश्विक सम्मान।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुरी सिल्क और प्राचीन मंजूषा कला ने एक ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे अंग प्रदेश का गौरव देशभर में बढ़ा दिया है। भागलपुरी सिल्क पर हाथ से उकेरी गई मंजूषा कला की विशेष साड़ी 15 जुलाई को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति भवन के एक आधिकारिक कार्यक्रम में पहने नजर आईं।
यह वही साड़ी है, जिसे मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित ने अप्रैल 2026 में राष्ट्रपति भवन में आयोजित 'आर्टिस्ट्स इन रेजिडेंसी वर्कशॉप' के दौरान महामहिम राष्ट्रपति को भेंट की थी। जिला कला संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने इसे अंग संस्कृति, बिहार की लोक परंपरा और सभी मंजूषा कलाकारों के लिए ऐतिहासिक सम्मान करार दिया है।
6 महिला कारीगरों ने 2 दिनों में दिन-रात मेहनत कर तैयार की थी साड़ी
राष्ट्रपति भवन में 15 से 20 अप्रैल 2026 तक आयोजित कार्यशाला में भाग लेने पहुंचे मनोज कुमार पंडित के नेतृत्व में मंजूषा कला प्रशिक्षण केंद्र की टीम ने महज दो दिनों में इस विशेष साड़ी को तैयार किया था।
प्रशिक्षण केंद्र की प्राचार्य सुमना के साथ महिला कारीगरों मानवी कुमारी, श्रुति राय, साक्षी राय, सुरभि सुमन, सुप्रिया कुमारी और बिंदु कुमारी ने दिन-रात एक कर भागलपुरी सिल्क पर मंजूषा कला का जीवंत चित्रांकन किया था। इस साड़ी में अंग प्रदेश की प्राचीन लोककथा, नारी शक्ति और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रतीकों को पिरोया गया था।
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भागलपुर की गलियों से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची मंजूषा की यात्रा
मंजूषा गुरु मनोज कुमार पंडित ने भावुक होते हुए कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि भागलपुर के बुनकरों, महिला कारीगरों और मंजूषा कला से जुड़े हजारों लोगों की वर्षों की साधना का सुखद परिणाम है।
उन्होंने कहा कि जो मंजूषा कला कभी भागलपुर की गलियों और ग्रामीण अंचलों तक सीमित थी, वह आज देश के सर्वोच्च भवन 'राष्ट्रपति भवन' तक पहुंच चुकी है। राष्ट्रपति द्वारा इस वस्त्र को धारण करने से मंजूषा कला के व्यावसायिक और वैश्विक उन्नति का नया मार्ग प्रशस्त होगा।