सरस्वती पूजा 2026 : सृष्टि को सौंदर्य, संगीत और ज्ञान से पूर्ण करेंगी मां शारदे, 23 जनवरी है शुभ दिन
सरस्वती पूजा 2026 : भागलपुर में 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा 2026 की भव्य तैयारियां चल रही हैं। शहर में लगभग एक हजार स्थानों पर मां सरस्वती ...और पढ़ें

सरस्वती पूजा 2026 : 23 January 2026 को मनाया जाएगा यह पर्व
HighLights
भागलपुर में 23 जनवरी को सरस्वती पूजा 2026।
शहर में लगभग एक हजार प्रतिमाएं होंगी स्थापित।
मूर्तिकार सागर और रंजीत पंडित जुटे प्रतिमा निर्माण में।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। सरस्वती पूजा 2026 : सृष्टि में ज्ञान, राग और रंग भरने वाली देवी सरस्वती के आगमन की तैयारियों से शहर बसंती भाव में रंगने लगा है। बसंत पंचमी के पावन अवसर पर 23 जनवरी, शुक्रवार को मां सरस्वती की पूजा-अर्चना होगी। शहर और आसपास के क्षेत्रों में करीब एक हजार स्थानों पर विद्या की अधिष्ठात्री देवी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। स्कूल, कालेज, कोचिंग संस्थान, सामाजिक संगठन और युवा समितियां श्रद्धा और उल्लास के साथ पूजा की तैयारियों में जुट गई हैं।
वीणा की तान, विद्या का मान, बसंती हुई भागलपुर की पहचान
सरस्वती पूजा को लेकर शहर के मूर्तिकारों के यहां दिन-रात सृजन का कार्य चल रहा है। इशाकचक पासी टोला के मूर्तिकार सागर ने बताया कि उन्होंने एक दर्जन से अधिक प्रतिमाएं तैयार की हैं, जिनकी लगभग सभी बुकिंग हो चुकी है। खलीफाबाग चौक के समीप स्थापित होने वाली प्रतिमा में पहाड़ पर विराजमान मां सरस्वती का मनोहारी दृश्य रचा गया है, जबकि सबौर भिठ्ठी के लिए वीणा के साथ खड़ी प्रतिमा तैयार की जा रही है। आर्मी क्लब के लिए लगभग 20 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का निर्माण किया गया है। प्रतिमाओं की कीमत पांच हजार से 20 हजार रुपये तक रखी गई है। एक महीने से अधिक समय से कारीगर पूरी तन्मयता से इस साधना में जुटे हैं।
श्वेत आभा, वीणा की ध्वनि,भागलपुर में बही सरस्वती की छवि
अम्बई के प्रसिद्ध मूर्तिकार रंजीत पंडित ने इस वर्ष करीब 80 सरस्वती प्रतिमाओं का निर्माण किया है। छह कारीगरों की टोली द्वारा तैयार की गई इन प्रतिमाओं की बहुत मांग है। उन्होंने बताया कि चार फीट से लेकर 13 फीट तक की प्रतिमाएं बनाई गई हैं, जो गुड़हट्टा चौक, कजरेली, करोड़ी बाजार, मछली पट्टी, अलीगंज, भीखनपुर सहित शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थापित होंगी।
हालांकि महंगाई बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है, लेकिन प्रतिमाओं की कीमत पिछले वर्ष के आसपास ही रखी गई है। सुतली, बांस और रंगों के दामों में भारी वृद्धि के बावजूद यह पुश्तैनी कला श्रद्धा और परंपरा के सहारे जीवित है।इस दिन विद्या, कला और संगीत की आराधना से जीवन में ज्ञान और सौम्यता का वास होता है। शहर में आस्था, कला और अध्यात्म का यह संगम भागलपुर को एक बार फिर बसंती उल्लास से भरने को तैयार है।
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सृष्टि को देवी ने बनाया जीवंत
बूढ़ानाथ मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित भूपेश मिश्र बताते हैं कि हिंदू पुराणों में ब्रह्मा द्वारा देवी सरस्वती का आह्वान सृष्टि को सौंदर्य, संगीत और ज्ञान से पूर्ण करने के भाव से जुड़ा है। मत्स्य पुराण के अनुसार, सृष्टि रचना के प्रारंभ में प्रकृति नीरस थी। तब ब्रह्मा ने सरस्वती को प्रकट कर वसंत की तरह संसार में रंग, राग और लय का संचार किया।
श्वेत वस्त्र, वीणा और कमल धारण किए मां सरस्वती का स्वरूप पवित्रता, माधुर्य और संतुलन का प्रतीक है। यह कथा केवल पौराणिक नहीं, बल्कि सृजनात्मक ऊर्जा और ब्रह्मांडीय संतुलन का आध्यात्मिक संदेश भी देती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा का मुहूर्त सुबह से लेकर देर रात तक रहेगा।