रोबस्टा केले से बढ़ेगी किसानों की कमाई, अब हड्डियां भी बनाएगा मजबूत
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग ने रोबस्टा केले में लगने वाले पनामा रोग का जैविक तरीके से सफल नियंत्रण कर लिया है। इससे किसा ...और पढ़ें

रोगमुक्त रोबस्टा केला से बढ़ेगी किसानों की कमाई
HighLights
TMBU ने रोबस्टा केले के पनामा रोग का जैविक नियंत्रण किया।
विशेष जैविक फॉर्मूला से फंगस जनित रोग पर काबू पाया।
किसानों को रोगमुक्त खेती से मिलेगा बेहतर उत्पादन और मुनाफा।
परिमल सिंह, भागलपुर। रोबस्टा केला कभी अपनी अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और बाजार में अच्छी मांग के कारण किसानों की पहली पसंद माना जाता था, लेकिन पनामा रोग के कारण इसकी खेती लगातार प्रभावित हो रही थी। इससे हजारों किसानों को हर वर्ष भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा था और कई किसान इसकी खेती छोड़ने लगे थे।
अब तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोतर वनस्पति विज्ञान विभाग ने रोबस्टा केले में लगने वाले पनामा रोग पर जैविक तरीके से सफल नियंत्रण करने में सफलता हासिल की है।
विश्वविद्यालय के बॉटनिकल गार्डन में किए गए इस शोध के बाद उम्मीद बढ़ गई है कि भविष्य में रोगरोधी रोबस्टा केले की खेती बड़े पैमाने पर होगी और किसानों को अधिक उत्पादन के साथ बेहतर मुनाफा भी मिलेगा।
वनस्पति विभाग ने भारत सरकार को भेजा पनामा रोग से नियंत्रण का प्रस्ताव
वनस्पति विज्ञान विभाग के वरिष्ठ सहायक प्राध्यापक व इस परियोजना की निगरानी कर रहे डॉ. विवेक कुमार सिंह ने बताया कि पनामा रोग के कारण रोबस्टा केला की खेती से किसान दूर होने लगे थे।
दरअसल, पनामा रोग केले की सबसे खतरनाक बीमारी है। यह मिट्टी में मौजूद फ्यूजेरियम फंगस के कारण फैलती है। रोग लगने पर पौधे की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधा फल देने से पहले ही सूख जाता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार को जैविक नियंत्रण का प्रस्ताव भेजा था। वर्ष 2024 में इस पर तीन वर्षों के लिए 30 लाख रुपये की शोध परियोजना स्वीकृत हुई।
शोध के लिए नवगछिया और कुर्सेला से रोबस्टा केले के पौधे लाकर टीएमबीयू के बाटनिकल गार्डन में लगाया गया। संक्रमित पौधों से पनामा रोग फैलाने वाले फंगस को अलग कर प्रयोगशाला में विकसित किया गया। इसके बाद लाभकारी प्रतिरोधी फंगस, वर्मी कम्पोस्ट, मशरूम अपशिष्ट और औषधीय पौधों के अर्क को मिलाकर विशेष जैविक फॉर्मूला तैयार किया गया।
खबरें और भी
इस फार्मूले का सफल परीक्षण प्रयोगशाला के बाद बाटनिकल गार्डन में लगे केले के पौधे पर किया गया। जिन पौधों पर इसका प्रयोग किया गया, वे अब भी स्वस्थ हैं और उनमें पनामा रोग नहीं लगा है।
उन्होंने बताया कि कुछ माह तक पौधों की निगरानी के बाद रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। मंजूरी मिलने पर यह तकनीक किसानों को निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
भूख नियंत्रण में सहायक होगी, हड्डियों भी मजबूत बनाएगा
विवेक ने दावा किया कि बाटनिकल गार्डन में लगे रोबस्टा केला के पौधे चार से पांच मीटर तक ऊंचा है और इसका एक फल औसतन 260 ग्राम तक का है।
रोबस्टा केला खाने के बाद देर तक भूख नहीं लगती है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके सेवन से हड्डियां मजबूत होती है।