भागलपुर के विक्रमशिला सेतु में बड़ी गड़बड़ी: 3 स्लैब खराब और 2 को तोड़ना ही पड़ेगा, मरम्मत संभव नहीं
विक्रमशिला सेतु के एक स्लैब के ध्वस्त होने के बाद हुई जांच में तीन अन्य स्लैबों में गड़बड़ी पाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, दो स्लैबों को मजबूत करना ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेतु में बड़ी गड़बड़ी: 3 स्लैब खराब और 2 को तोड़ना ही पड़ेगा, मरम्मत संभव नहीं
HighLights
एक स्लैब गिरने के बाद तीन अन्य में गड़बड़ी मिली।
विशेषज्ञों ने दो स्लैबों को तोड़कर नया बनाने को कहा।
पुल की 25 साल में सिर्फ एक बार मरम्मत हुई।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या पी-टू और थ्री के बीच का स्लैब ध्वस्त होकर गंगा में समा गया है। इस हादसे के बाद लगातार चार दिनों तक विस्तृत जांच की प्रक्रिया चलती रही। इस दौरान अभियंताओं की टीम के साथ-साथ आईआईटी और बीआरओ के एक्सपर्ट ने संयुक्त रूप से सेतु का निरीक्षण किया।
जांच के क्रम में संरचना की गुणवत्ता का भी परीक्षण किया गया। बीआरओ की टीम द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में सेतु की क्वालिटी ठीक बताया गया है।
हालांकि, तकनीकी स्तर पर कुछ खामियां सामने आने की बात कही गई है, लेकिन एक स्लैब यानी भागलपुर की ओर अपने स्थान से फिसलकर नीचे गिर गया था, जिससे घटना की स्थिति बनी। इसके अलावा इसी प्रकार के तीन अन्य स्लैब के पोजिशन में गड़बड़ी की आशंका जताई गई है।
इन सभी स्लैबों को चिह्नित कर लिया गया है और उनकी विस्तृत तकनीकी जांच की प्रक्रिया आगे की जाएगी। अभियंताओं की टीम द्वारा इन हिस्सों की बारीकी से परीक्षण किया जाएगा, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। दरअसल, स्लैब जिस गर्डर पर रखा हुआ था।
उसके एक ओर नोज हिस्से में घिसावट होने की बात सामने आई है। जिसे तकनीकी कारणों में एक संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। वहीं, स्पेन भी धंसा हुआ नजर आया है। दो दिन पहले पुल निर्माण निगम के विशेषज्ञों से भी जांच कराई गई थी।
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निरीक्षण करने पहुंचे पुल निर्माण निगम के कंसल्टेंट इंजीनियर आलोक भौमिक ने कहा कि पुल के आठ स्पेन हैं। सभी स्पेन में गड़बड़ी है। जिस जगह का स्पेन गिरा है उसके बाद वाली पोल संख्या 132 व 134 का स्पेन पूरा खराब है। जो नहीं गिरा है उसको जल्द तोड़कर गिरना पड़ेगा।
आवाजाही होती थी, उस साइड सड़क अधिक धंसी हुई है, जबकि हल्के वाहनों वाली साइड में अपेक्षाकृत सड़क ऊंची है। इससे साफ संकेत मिलता हैं कि ओवरलोड वाहनों का दबाव पुल की संरचना पर गंभीर असर डाल रहा है।
विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पुल के अन्य हिस्सों में भी खतरा बढ़ सकता है।
एनएच के अधिकारियों का कहना है कि अभी आइआइटी पटना और मुंबई की बड़ोदरा नामक कंपनी के विशेषज्ञों की टीम जांच कर रही है। इस टीम की संयुक्त रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि कितना नुकसान पहुंचा है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर तोड़ने या मजबूतीकरण करने का निर्णय लिया जा सकेगा।
वैसे भी पुल के दुरुस्तीकरण के बाद भी भारी वाहनों का परिचालन नहीं हो सकेगा। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार दो स्लैब को तोड़कर नया स्लैब ढालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है। मजबूतीकरण संभव नहीं है।
इधर, विक्रमशिला सेतु पर स्लैब गिरने की घटना के बाद चल रही जांच में इसके पीछे एक अहम कारण समय पर मरम्मत का नहीं होना बताया जा रहा है। इंजीनियरों की टीम ने इस ओर संकेत किया है कि यदि सेतु की नियमित अंतराल पर मरम्मत होती रहती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
विक्रमशिला सेतु की संरचनात्मक मरम्मत हर पांच वर्ष में किये जाने का प्रावधान माना जाता है, लेकिन इसकी समय-समय पर अनदेखी की गई। पिछले 25 वर्षों में सेतु की मरम्मत केवल एक बार कराई गई है, वह भी आठ वर्ष पूर्व 2017 में हुई थी, जबकि इस दौरान तीन बार मरम्मत होनी चाहिए थी।
जांच टीम का मानना है कि नियमित रखरखाव नहीं होने के कारण स्लैब और अन्य संरचनात्मक हिस्सों पर दबाव बढ़ता गया। जिससे तकनीकी समस्या उत्पन्न हुई है।
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