विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के गर्डर लॉन्चिंग का काम शुरू, इसी महीने तैयार होगा पुल
भागलपुर में दो हिस्सों में बंटे विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के गर्डर लॉन्चिंग का काम शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेंतु पर बेली ब्रिज निर्माण कार्य के लिए जेवीसी से सड़क पर काम करते हुएI (जागरण)
HighLights
भागलपुर में विक्रमशिला सेतु पर गर्डर लॉन्चिंग शुरू हुई।
बीआरओ का लक्ष्य इस महीने बेली ब्रिज निर्माण पूरा करना।
आईआईटी पटना क्षतिग्रस्त सेतु की जांच कर रही है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। दो हिस्सों में बंट चुके विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज के गर्डर लॉन्चिंग की प्रक्रिया शुक्रवार से भागलपुर की ओर शुरू कर दी गई है।
सेतु पर ही लोहे के ढांचे में नल-बोल्ट और स्क्रू टाइट किए जा रहे हैं। नवगछिया की ओर भी काम में तेजी आ गई है। सेतु सड़क से अलकतरा और गिट्टी को उखाड़ा जा रहा है। बार्डर रोड्स आर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के अधीक्षण अभियंता विपिन कुमार चंद ने बताया कि बेली ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया में 13-14 दिन लग सकते हैं।
दूसरी ओर, आईआईटी, पटना और मुंबई की एजेंसी एजेंसी स्ट्रक्चरल स्पेशलिटिस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड नवगछिया की ओर पुल की जांच कर रही है।
जांच पूरी होने के बाद समेकित रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जिसके आधार पर विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की रूपरेखा तय होगी।
बीआरओ के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि कोलकाता से बेली ब्रिज के सभी उपकरण भागलपुर पहुंच चुके हैं। इसी माह ब्रिज निर्माण पूरा करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम किया जा रहा है।
सेतु के गर्डर और स्लैब का बारीकी से किया जा रहा आकलन
तकनीकी टीम सेतु के गर्डर और स्लैब की स्थिति का बारीकी से आकलन कर रही है। देखा जा रहा है कि किन हिस्सों को बदलने की जरूरत है, किस प्रकार की संरचना तैयार कर उसे फिट किया जाए, ताकि पुल की मजबूती बनी रही।
विशेषज्ञ इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि मरम्मत कार्य भविष्य की जरूरतों और बढ़ते यातायात दबाव को ध्यान में रखकर किया जाए।
बेयरिंग के अपने जगह से खिसकने के कारण खिसका स्लैब
एक महीने पूर्व ही एनएच, पुल निर्माण निगम के अभियंता और विशेषज्ञों की टीम ने नाव से सेतु के निचले और ऊपरी हिस्से की जांच की थी।
इस दौरान यह बात सामने आई थी बेयरिंग के अपने जगह से खिसकने के कारण भागलपुर छोर का 150 एनएम स्लैब नवगछिया की ओर खिसक गया है।
इसके बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया। जिस कारण तीन मई की रात पिलर संख्या पी वन व टू का स्लैब ध्वस्त होकर गंगा में गिर गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि नवगछिया की ओर 150 एमएम स्लैब खिसक गया था। उसके आगे एक्सपेंशन ज्वाइंट रहने के कारण स्लैब आगे खिसक ही नहीं सकता था।
इसके बावजूद उसी कमजोर स्लैब पर भारी वाहनों का परिचालन जारी रहने से वह और कमजोर होता चला गया। जांच टीम की लापरवाही और वाहनों के दबाव के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही 150 एमएम स्लैब खिसकने की बात सामने आई सेतु पर वाहनों के संचालन को तत्काल रोक लगाकर मरम्मत कराने की दिशा में काम शुरू कर देनी चाहिए थी।
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विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज बनाने का काम चल रहा है। गर्डर लॉन्चिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस माह निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। आइआइटी की जांच चल रही है। 15 दिनों में समेकित रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है।
जितेंद्र कुमार, प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड।