भागलपुर विक्रमशिला सेतु में 13 जगहों पर बढ़ी दरार, मरम्मत का खर्च 75-80 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का 26 करोड़ का पुराना प्राक्कलन स्लैब गिरने के बाद रद हो गया है। अब क्षतिग्रस्त पुल की मरम्मत के लिए 75-80 करोड़ रुपये का नय ...और पढ़ें

भागलपुर विक्रमशिला सेतु में 13 जगहों पर बढ़ी दरार

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, भागलपुर। करीब एक माह पूर्व विक्रमशिला सेतु के दुरुस्तीकरण के लिए पुल निर्माण निगम ने 26 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर मुख्यालय भेजा था। जटिल प्रक्रिया में फंसी प्राक्कलन राशि को मंजूरी मिलने से पहले ही चार दिन पहले रविवार की रात को पोल संख्या 133 के पास विक्रमशिला सेतु का स्लैब ध्वस्त होकर गंगा में समा गया।
इस हादसे के बाद भेजे गए प्राक्कलन को निरस्त कर अब नए सिरे से प्राक्कलन तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। अब राशि बढ़कर 75-80 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ऐसे में विक्रमशिला सेतु के दुरुस्तीकरण का मामला चुनौती से कम नहीं है।
13 से अधिक पिलरों के पास एक्सपेंशन ज्वाइंट की दरार काफी बढ़ गई है। पिलर संख्या 89, 113, 125, 141, 148 एवं 128 सहित 13 से अधिक स्थानों पर ऐसी स्थिति है।
स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब पुल के ऊपर से नीचे का हिस्सा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर ज्वाइंट से गंगा नदी तक दिखने लगी है। एक्सपेंशन ज्वाइंट के गैप ज्यादा बढ़ने की वजह से इसके बेरियंग भी खराब हो गई हैं।
वाहनों के गुजरने पर तेज आवाज आती है और झटके महसूस होते हैं। भारी वाहनों के चलने पर पुल में अत्यधिक कंपन उत्पन्न होता है, जो इसकी संरचनात्मक सुरक्षा के लिए चिंताजनक संकेत है। एक्सपेंशन ज्वाइंट में बढ़ती गैप के कारण रेलिंग के बीच भी दूरी बढ़ गई है।
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इसके चलते वाहनों को बार-बार ब्रेक लगाना पड़ता है, जिससे यातायात की गति प्रभावित होती है और जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बार-बार ब्रेक लगाने और लंबे समय तक वाहनों के खड़े रहने से पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि जर्जर हो चुके इस पुल पर आए दिन वाहन खराब हो रहे हैं और सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। जिस समय इस सेतु का निर्माण किया गया था, उस समय यातायात और भार क्षमता वर्तमान की तुलना में काफी कम थी।
वर्तमान में प्रतिदिन 50-60 हजार भारी वाहन इस पुल से गुजरते हैं, जिनमें आठ-दस हजार भारी वाहन शामिल हैं। कई वाहन 60 से 65 टन या उससे अधिक भार लेकर चलते हैं, जिससे पुल पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है।
एनएच के मुख्य अभियंता संजय भारती ने बताया कि पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद अब नए सिरे से प्राक्कलन तैयार होगा। कितनी राशि का दोबारा प्राक्कलन बनेगा।
फिलहाल इसके बारे में बताने से इनकार करते हुए उन्होंने बताया कि तीन माह में पुल को ठीक करने की दिशा में काम किया जा रहा है। पुल दुरुस्तीकरण कार्य के दौरान इसके सेफ्टी ऑडिट भी साथ-साथ कराया जाएगा, ताकि आगे कोई समस्या खड़ी नहीं हो सके। उन्होंने बताया कि इस पुल पर भारी वाहनों का परिचालन संभव नहीं हो सकेगा।