1 सितंबर से बंद रहेगा विक्रमशिला सेतु, यात्रियों की राहत के लिए नदी पर बन सकता है 'पॉन्टून ब्रिज'
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बिहार में पॉन्टून ब्रिज समेत विभिन्न सड़क परियोजनाओं का निरीक्षण करने आ सकते हैं। ...और पढ़ें

पाॅन्टून ब्रिज। (जागरण)
HighLights
विक्रमशिला सेतु का ध्वस्त हिस्सा 1 सितंबर से बंद होगा।
मंत्री शैलेंद्र ने गडकरी से पॉन्टून ब्रिज बनाने की मांग की।
गडकरी बिहार आकर परियोजनाओं का निरीक्षण करेंगे, सकारात्मक पहल।
संवाद सूत्र, बिहपुर। भागलपुर-नवगछिया विक्रमशिला सेतू के ध्वस्त हिस्से का पुनर्निमाण को लेकर सेतू पर वाहनों का आवागमन अगामी एक सितंबर से पूर्णत: बंद हो जाएगा। जिसकी घोषणा शासन व प्रशासन की ओर से कर दी गई है।
वहीं, सेतू के पुनर्निमाण कार्य पूर्ण करने की डेडलाइन भी 30 नवंबर घोषित है। वहीं, राज्य के पथ निर्माण मंत्री सह बिहपुर विस विधायक इं.शैलेंद्र नई दिल्ली में केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलकर इस सेतू के पुनर्निमाण कार्य के दौरान इसके समानांतर एक पाॅन्टून ब्रिज बनवाने की मांग समेत अन्य कई सड़क व पुल परियोजना हेतु उन्हें ज्ञापन सौंपा।
मिली जानकारी के अनुसार मंत्री इं. शैलेंद्र की मांग पर केंद्रीय मंत्री गडकरी ने ना सिर्फ साकारात्मक पहल करने की बात कही।
बल्कि बिहार आकर उक्त मांगों के बारे जानने, परियोजनाओं का निरीक्षण व इसको लेकर संबधित अधिकारियों से पूरी जानकारी लेकर अग्रेतर कार्रवाई करने की बात कही है।
क्या व कैसा होता है पॉन्टून ब्रिज?
पॉन्टून ब्रिज एक अस्थाई तैरता हुआ पुल होता है। जो एक तरह से पीपापुल जैसा ही होता है। जिसे नदी पर बड़े-बड़े स्टील के खोखले पॉन्टून (फ्लोटिंग प्लेटफार्म) को एक-दूसरे से जोड़कर बनाया जाता है। इन पॉन्टून को मजबूत एंकरिंग व केबल से स्थिर किया जाता है।
फिर इनके ऊपर स्टील गार्डर, प्लेट व सड़क की सतह बिछाकर वाहनों के आवागमन योग्य बनाया जाता है।
कम समय में हो जाता है तैयार
इस प्रकार का पुल काफी कम समय में तैयार हो जाता है। जरूरत पड़ने पर इसे हटाकर फिर से स्थापित भी किया जा सकता है। पॉन्टून ब्रिज की मुख्य विशेषता है कि यह उत्प्लावन के नियम पर काम करता है। पीपों के अंदर हवा भरी होती है, जो पानी पर तैरती है।
जो अच्छी तरह से लोगों व वाहनों के वजन को संभालती है। अस्थायी प्रकृति: इन्हें बहुत कम समय में आसानी से बनाया और हटाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल आपातकालीन स्थितियों में नदी को पार करने के लिए किया जाता है। यह पुल विशेष रूप से उन जगहों पर बनाया जाता है। जहां पर स्थाई पुल बनाना मुश्किल व समय लेने वाला होता है।