मनरेगा की जगह लागू हुआ विकसित भारत रोजगार मिशन; अब 125 दिन काम व ₹300 मजदूरी, भागलपुर में हुए सम्मेलन से आप समझें
भागलपुर में 'विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन' पर पंच सम्मेलन हुआ, जो मनरेगा की जगह लेगा। यह नया अधिनियम 125 दिन का रोजगार और ₹300 न्यूनतम द ...और पढ़ें

टाउन हॉल में आयोजित पंच सम्मेलन में त्रिस्तरीय पंचायत जनप्रतिनिधियों को दिए गए नए अधिनियम के दिशा-निर्देश
HighLights
मनरेगा की जगह 'विकसित भारत रोजगार मिशन' अधिनियम लागू।
ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिन का रोजगार मिलेगा।
₹300 न्यूनतम दिहाड़ी, AI और जियोस्पेशियल तकनीक से पारदर्शिता।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के निर्देश पर 'विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' को लेकर शनिवार को टाउन हॉल में एक दिवसीय पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में जिले के त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को नए अधिनियम के मुख्य प्रावधानों से अवगत कराया गया और ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों को जागरूक करने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त (DDC), प्रखंड प्रमुख, मुखिया और पंचायत समिति सदस्यों सहित कई विभागों के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
100 की जगह 125 दिन का रोजगार, ₹300 प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी
सम्मेलन में अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में संचालित मनरेगा योजना के स्थान पर 1 जुलाई 2026 से नया अधिनियम लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत:
रोजगार की गारंटी: ग्रामीण परिवारों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा।
न्यूनतम मजदूरी: प्रतिदिन की न्यूनतम मजदूरी ₹300 निर्धारित की गई है, जिसमें औसतन 10% की वृद्धि का प्रावधान है।
बेरोजगारी भत्ता: निर्धारित समयसीमा के भीतर काम उपलब्ध न कराने पर आवेदक को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।
वित्तीय साझेदारी: योजना में केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 का वित्तीय अनुपात रहेगा।
एआई और जियोस्पेशियल तकनीक से होगी धांधली पर रोक
परियोजनाओं में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा। अब मजदूरों की हाजिरी बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से होगी, जबकि योजनाओं की मॉनिटरिंग जियोस्पेशियल मैपिंग और रियल-टाइम डैशबोर्ड से की जाएगी। योजना निर्माण, ऑडिट और वित्तीय जोखिम को कम करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग होगा। इसके अलावा हर छह महीने में सोशल ऑडिट अनिवार्य किया गया है।
आत्मनिर्भर गांव के लिए तैयार होगी विकसित ग्राम पंचायत योजना
नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों को A, B और C श्रेणियों में बांटकर विकास कार्य तय किए जाएंगे। अधिनियम के तहत 4 प्रमुख थीमैटिक क्षेत्रों में कुल 318 प्रकार के विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई है। ग्राम सभा की सीधी भागीदारी से 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार की जाएगी, ताकि अंतिम व्यक्ति तक इसका लाभ पहुंचे और गांव आत्मनिर्भर व समृद्ध बन सकें।