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    दिन में सरकारी दफ्तर की नौकरी, रात में पढ़ाई... क्लर्क से SDM बनकर आनंद ओझा ने लिखी सफलता की कहानी

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 07:32 PM (IST)

    आरा जिला शिक्षा कार्यालय में लिपिक आनंद ओझा ने बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में एसडीएम पद के लिए चयन होकर बड़ी सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि यु ...और पढ़ें

    सात साल तक निभाई लिपिक की जिम्मेदारी

    सात साल तक निभाई लिपिक की जिम्मेदारी

    HighLights

    1. लिपिक आनंद ओझा का एसडीएम पद पर चयन।

    2. सात साल तक लिपिक रहते हुए की पढ़ाई।

    3. उनकी सफलता युवाओं के लिए बनी प्रेरणा।

    जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। आरा जिला शिक्षा कार्यालय में कार्यरत लिपिक आनंद ओझा ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा में उनका चयन एसडीएम पद के लिए हुआ है। इस उपलब्धि के बाद शिक्षा विभाग में खुशी का माहौल है।

    बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा में 133वीं रैंक हासिल कर आनंद ओझा ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे जिले और विभाग का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता अब युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

    सात साल तक निभाई लिपिक की जिम्मेदारी

    आनंद ओझा पिछले सात वर्षों से जिला शिक्षा कार्यालय में लिपिक के रूप में कार्यरत थे। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई और तैयारी को भी जारी रखा।

    लगातार मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई और एसडीएम पद के लिए चयनित हुए।

    शिक्षा विभाग ने किया सम्मानित

    इस उपलब्धि पर गुरुवार को जिला शिक्षा कार्यालय में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिला शिक्षा पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार राय और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी राहुल रंजन ने उन्हें सम्मानित किया।

    अधिकारियों ने बुके, अंगवस्त्र, मोमेंटो और फूलमाला देकर उनका अभिनंदन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

    युवाओं के लिए बने प्रेरणा

    अधिकारियों ने कहा कि आनंद ओझा की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धि विभाग के अन्य कर्मियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।

    सहकर्मियों ने दी बधाई

    सम्मान समारोह के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आनंद ओझा को बधाई दी और उनकी सफलता पर खुशी जताई।

    सभी ने उम्मीद जताई कि वह प्रशासनिक सेवा में भी अपनी कार्यशैली और समर्पण से नई पहचान बनाएंगे।

    संघर्ष और मेहनत की बनी मिसाल

    आनंद ओझा की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए संदेश है, जो नौकरी के साथ-साथ बड़े सपने देखते हैं। उन्होंने दिखाया कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, लक्ष्य के प्रति समर्पण सफलता का रास्ता खोल देता है।

    अब फाइलों के बीच काम करने वाले आनंद ओझा प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ लोगों की सेवा करते नजर आएंगे।