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    भोजपुर में भरत तिवारी स्‍मारक की तैयारी पर लगा ब्रेक; NOC नहीं होने पर प्रशासन की आपत्ति

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 12:30 PM (GMT+05:30)

    बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी के स्मारक का निर्माण कार्य भूमि विवाद के कारण रुक गया है। सरकारी और निजी भूमि पर आपत्तियों क ...और पढ़ें

    इसी स्‍थान पर बन रहा था स्‍मारक, और भरत त‍िवारी का फाइल फोटो।

    इसी स्‍थान पर बन रहा था स्‍मारक, और भरत त‍िवारी का फाइल फोटो।

    पंचायत सूत्र, बिलौटी (शाहपुर)। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए बिलौटी गांव के भरत भूषण तिवारी की स्मृति में प्रस्तावित स्मारक निर्माण कार्य फिलहाल विवादों में घिर गया है।

    स्मारक निर्माण के लिए कथित एनकाउंटर स्थल पर चबूतरा बनाने का कार्य शुरू किया गया था। इसके बाद प्रशासन ने निर्माण स्थल की भूमि को लेकर आपत्ति जताते हुए कार्य पर रोक लगाने को कहा। 

    जानकारी के अनुसार शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने कहा कि जिस भूमि पर स्मारक निर्माण शुरू किया गया है। वह बिहार सरकार की भूमि है।

    एनओसी के ब‍िना नहीं हो सकता न‍िर्माण

    उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के किसी भी प्रकार का निर्माण नहीं कराया जा सकता। यदि सरकारी भूमि पर निर्माण किया जाता है तो उसे रोका जाएगा।

    वहीं निर्माण स्थल से सटी निजी भूमि के रैयत ने भी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि स्मारक सड़क के मध्य भाग में बनाया जाए और सड़क का विस्तार उनकी जमीन की ओर कर दिया जाए।

    भूमि संबंधी इन दोनों आपत्तियों के कारण स्मारक निर्माण का कार्य फिलहाल ठप पड़ गया है। बताया जाता है कि प्रथम चरण में आठ गुणा आठ वर्ग फीट का संगमरमरयुक्त चबूतरा बनाया जाना है।

    इसके बाद उसी पर भरत भूषण तिवारी की सफेद संगमरमर से बनी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की योजना है। स्मारक परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की भी तैयारी है। ताकि लोग वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

    उत्‍तराखंड स्‍थ‍ित मठ उठा रहा खर्च

    परिजनों व स्थानीय लोगों के अनुसार स्मारक निर्माण का पूरा खर्च उत्तराखंड स्थित एक मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज द्वारा वहन किया जा रहा है।

    स्वामी आनंद स्वरूप महाराज एक सप्ताह पूर्व बिलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से मिले थे और प्रस्तावित स्मारक स्थल पर प्रतीकात्मक रूप से पहली ईंट भी रखी थी।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि संबंधी विवाद का समाधान हो जाता है तो स्मारक निर्माण कार्य दोबारा शुरू कराया जाएगा।

    स्मारक बनने के बाद यह स्थल भरत भूषण तिवारी की स्मृति से जुड़े प्रमुख स्थान के रूप में विकसित हो सकता है।

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