भोजपुर में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा: दो सगे भाई गिरफ्तार, नकदी समेत कई सामान जब्त
भोजपुर पुलिस ने यूपीआई और फोन कॉल के जरिए 60 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। नवादा के दो सगे भाई विकास और व ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले की साइबर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने यूपीआई एवं फोन काल के माध्यम से करीब 60 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान मूल रूप से नवादा जिले के हिसुआ थाना के मंझवे गांव निवासी विकास कुमार चौरसिया और विशाल कुमार चौरसिया के रूप में हुई है।
दोनों वर्तमान में पटना के रामकृष्णनगर मोहल्ले में मकान बनाकर रह रहे थे। फर्जी अफसर बनकर एक दिन में सौ-से डेढ़ सौ लोगों को फोन करते थे। पुलिस ने आरोपित भाइयों के पास से एक कार, 11 मोबाइल फोन, एक राउटर, एटीएम कार्ड, कई सिम कार्ड, एक लैपटाप और ठगी की रकम में से एक लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। इसकी जानकारी सोमवार को साइबर थाना डीएसपी स्नेहू सेतू ने प्रेस वार्ता में दी।
डीएसपी ने बताया कि यह गिरोह यूपीआई से जुड़े मोबाइल नंबर को पोर्ट कर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बना लेता था और खाते से आसानी से रुपये उड़ा लेता था। अब तक अलग-अलग लोगों के खातों से करीब 60 लाख रुपये की ठगी की जा चुकी है। ठगी की रकम को किसी निर्दोष व्यक्ति के खाते में मंगाकर तुरंत निकाल लिया जाता था।
उन्होंने बताया कि नोएडा और दिल्ली में बैठे एजेंटों के जरिए किसी भी अनजान व्यक्ति का मोबाइल नंबर पोर्ट करवा लिया जाता था। चूंकि अधिकतर लोगों के बैंक खाते मोबाइल नंबर से जुड़े होते हैं, इसलिए नंबर पोर्ट होते ही आरोपी खातों को हैक कर उनका दुरुपयोग करने लगते थे।इस गिरोह की गतिविधियों को लेकर साइबर थाना को कई शिकायतें मिली थीं।
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इसी क्रम में आरा टाउन थाना क्षेत्र के अबरपुल निवासी सुबोध कुमार के खाते से साढ़े तीन लाख रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले में उन्होंने नौ सितंबर 2025 को आरा साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि निर्वाचन विभाग का फर्जी पदाधिकारी बनकर बीएलओ के कार्य की प्रगति के संबंध में पूछताछ की गई थी। इसके बाद उनके नंबर पर ओटीपी बनकर जानकारी ली गई थी। इसके बाद खाते से पैसे उड़ा लिए गए थे ।
प्राथमिकी के आधार पर पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने विभिन्न बैंक खातों की जांच-पड़ताल करते हुए गिरोह तक पहुंच बनाई। इसके बाद नवादा जिले के हिसुआ और नादरीगंज तथा पटना के रामकृष्णनगर इलाके में छापेमारी कर साइबर ठगी में संलिप्त दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है।
साइबर ठगी के पैसों से पटना में पांच तल्ला मकान, होगी जांच
साइबर डीएसपी ने बताया कि गिरफ्तार दोनों आरोपितों ने साइबर ठगी से अर्जित रकम को पटना के रामकृष्णा नगर स्थित अपने पांच तल्ले मकान के निर्माण में भी लगाया है। पूछताछ के दौरान दोनों ने इस बात को स्वीकार किया कि ठगी से मिले पैसों का निवेश मकान निर्माण में किया गया है। बताया गया कि मकान की अनुमानित कीमत चार से पांच करोड़ रुपये से अधिक है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) और आयकर विभाग के माध्यम से संपत्ति की विस्तृत जांच कराई जाएगी।
एजेंटों के माध्यम से कराते थे मोबाइल नंबर पोर्ट
साइबर डीएसपी ने बताया कि पकड़े गए दोनों फ्राड नोएडा और दिल्ली के एजेंटों के जरिए निर्दोष लोगों के मोबाइल नंबर पोर्ट कराकर साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते थे। पुलिस नोएडा और दिल्ली में सक्रिय ऐसे एजेंटों की पहचान में जुटी है। दरअसल, सिम कंपनियों को हर माह मोबाइल नंबर पोर्ट कराने का लक्ष्य दिया जाता है। इसी आड़ में सिम विक्रेताओं से मिलीभगत कर एजेंट आसानी से किसी अन्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर पोर्ट करा लेते थे।