आरा में 52.56 करोड़ की गंगा कटावरोधी परियोजना पर संकट, बढ़ते जलस्तर से अधूरा काम डूबा
गंगा नदी के जवइनिया गांव के पास कटाव निरोधी कार्य की धीमी गति से 31 जुलाई की समय-सीमा पर संकट आ गया है, क्योंकि बढ़ते जलस्तर के कारण निर्माणाधीन संरचन ...और पढ़ें

जवइनिया गांव के समीप गंगा नदी के तट पर चल रहे कटाव निरोधी कार्य का डूबा हुआ हिस्सा। जागरण
संवाद सूत्र, शाहपुर (आरा)। तारीख पर तारीख मिलने के बावजूद जवइनिया गांव के समीप गंगा नदी के तट पर चल रहे कटाव निरोधी कार्य की रफ्तार नहीं बढ़ सकी।
करीब 1200 मीटर लंबाई में हो रहे बोल्डर पिचिंग कार्य के पूर्वी छोर पर लगभग 300 मीटर हिस्सा अब भी अधूरा है। इस बीच गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण निर्माणाधीन पार्कोपाइन संरचनाएं पानी में डूबने लगी हैं।
जबकि बेसमेंट में किया गया कार्य भी पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। इधर गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि और बीच-बीच में हो रही बारिश से निर्माण कार्य और प्रभावित हो रहा है।
52.56 करोड़ की बोल्डर पिचिंग पर गंगा का पानी भारी
ऐसे में स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विभाग द्वारा तय की गई 31 जुलाई की समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा होना अब संभव नहीं दिख रहा है।
लोगों का आरोप है कि संवेदक की मनमानी और अधिकारियों की उदासीनता के कारण जनता के टैक्स की करोड़ों रुपये की राशि पानी में डूब रही है।
बताया जाता है कि जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव, उड़नदस्ता टीम और जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान संवेदक को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि श्रमिकों की संख्या बढ़ाकर 800 की जाए।
तारीख पर तारीख, फिर भी अधूरा कटाव निरोधी कार्य
ताकि बाढ़ आने से पहले कार्य पूरा कराया जा सके। श्रमिकों की कमी का मुद्दा स्थानीय विधायक राकेश रंजन ने विधानसभा सत्र में भी उठाया था।
इसके बावजूद निर्माण स्थल पर मजदूरों की संख्या 200 से अधिक नहीं बढ़ाई गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्य की धीमी गति को लेकर शिकायत करने वाले जनप्रतिनिधियों को भी संवेदक चुनौती देता रहा।
लेकिन निर्माण की रफ्तार में कोई सुधार नहीं हुआ। उधर उड़नदस्ता टीम ने निर्माण सामग्री के नमूने जांच के लिए लिए थे। लेकिन करीब 70 प्रतिशत कार्य पूरा होने के बाद भी जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसे लेकर भी लोगों में सवाल उठने लगे हैं। गौरतलब है कि जवइनिया गांव के समीप गंगा नदी के कटाव से सुरक्षा के लिए सरकार ने करीब 1200 मीटर लंबाई में बोल्डर पिचिंग एवं अन्य कटाव निरोधी कार्य की स्वीकृति दी थी।
इस परियोजना पर 52 करोड़ 56 लाख रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान है। लेकिन कार्य की धीमी प्रगति और बढ़ते जलस्तर ने इसकी गुणवत्ता एवं समय पर पूर्णता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।