प्रेमियों को टावर से उतारने में पुलिस के छूटे पसीने, बिहार में पनप रहा ‘वीरू स्टाइल’ का खतरनाक ट्रेंड
बिहार के भोजपुर में प्रेम-संबंधी विवादों को लेकर मोबाइल टावरों पर चढ़ने का 'वीरू स्टाइल' चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पुलिस को इन्हें नीचे उतारने में ...और पढ़ें
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बिहार में टावर चढ़ने की बढ़ी घटनाएं। फाइल फोटो
HighLights
भोजपुर में प्रेम-संबंधी विवादों में टावर पर चढ़ने का चलन।
यह 'वीरू स्टाइल' ड्रामा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती।
युवाओं में भावनात्मक असंतुलन, बड़े हादसे का खतरा।
दीपक, आरा। “कूद जाऊंगा... फांद जाऊंगा...”। 1975 की चर्चित फिल्म शोले में पानी की टंकी पर चढ़े वीरू का दृश्य आज भी लोगों को याद है। उस दौर में प्रेम का प्रदर्शन फिल्मों तक सीमित था, लेकिन अब भोजपुर में हकीकत फिल्मों की पटकथा को पीछे छोड़ती दिख रही है।
फर्क सिर्फ इतना है कि पानी की टंकी की जगह अब मोबाइल टावर ने ले ली है। सूबे के अन्य जिलों के साथ भोजपुर जिले में भी इन दिनों प्रेम-प्रसंग, शादी की जिद और पारिवारिक विरोध के बीच मोबाइल टावर पर चढ़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं।
यह केवल ड्रामा नहीं, बल्कि समाज के बदलते मानसिक दबाव और भावनात्मक विस्फोट की खतरनाक तस्वीर बनता जा रहा है। सामाजिक जानकार मानते हैं कि बदलते सामाजिक ढांचे, पारिवारिक दबाव, प्रेम संबंधों में अस्वीकृति और इंटरनेट मीडिया के दौर में सार्वजनिक सहानुभूति पाने की चाहत ऐसे कदमों को बढ़ावा दे रही है।
कभी भी बड़े हादसे का खतरा
युवाओं में धैर्य की कमी और भावनात्मक असंतुलन भी बड़ी वजह मानी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का भी कहना है कि मोबाइल टावर पर चढ़ना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है।
खबरें और भी
ऊंचाई से गिरने और तकनीकी जोखिम के कारण किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि पारिवारिक या प्रेम संबंधी विवादों का समाधान बातचीत और कानून के दायरे में रहकर करें।
भोजपुर में उभरता यह “टावर ट्रेंड” सिर्फ खबर नहीं, समाज के भीतर बढ़ते भावनात्मक विस्फोट का संकेत है। इश्क अब सिर्फ दिल की बात नहीं रह गया, बल्कि जिद, दबाव और सार्वजनिक प्रदर्शन का रूप लेने लगा है।
केस स्टडी-01
13 मई कोसहार थाना क्षेत्र के गुलजारपुर गांव में महेश उर्फ मंटू पासवान नामक युवक अपनी पसंद की युवती से शादी कराने की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया था। करीब तीन घंटे तक पूरा गांव हाईवोल्टेज ड्रामे का गवाह बना रहा।
पुलिस, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण लगातार उसे समझाते रहे। आखिरकार लंबी मशक्कत के बाद युवक नीचे उतरा था, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली थी। इस दौरान पुलिस को लड़की पक्ष से युवक की बात करानी पड़ी थी।
केस स्टडी-02
14 अप्रैल को चांदी थाना क्षेत्र के बहियारा गांव में एक युवती भी प्रेम संबंधी विवाद को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गई थी। शादी करवाने की जिद पर अड़ी थी। बाद में प्रेमी युवक से मोबाइल पर बात करवाने का आश्वास देकर उसे मोबाइल टावर से नीचे उतारा गया था।
उस घटना में भी घंटों अफरातफरी मची रही थी। करीब एक घंटे बाद पुलिस ने राहत की सांस ली थी। बाद में नीचे उतारी गई युवती को स्वजन के हवाले कर दिया गया था।
ऐसे कदम अक्सर आवेश में उठाए जाते हैं। नया युवा चाहता है कि उसकी बात तुरंत सुनी जाए और परिवार या समाज उस पर दबाव में आ जाए। लेकिन यह विरोध का तरीका नहीं, बल्कि आत्मघाती जोखिम है। एक छोटी सी चूक जिंदगी खत्म कर सकती है। -डॉ. एके सिंह, मनोचिकित्क,आरा
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