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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 11, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bhojpur News: गजब है..., जमीन कारोबारी ने राजस्व चोरी के लिए बदल दिया जमीन का मौजा; ऐसे खुला राज

    Updated: Sun, 11 May 2025 03:20 PM (IST)

    बिहिया में भूमि खरीद-बिक्री से जुड़े कारोबारियों द्वारा राजस्व चोरी का मामला सामने आया है। फिरोज अंसारी नामक एक कारोबारी ने मौजा बदलकर जमीन की रजिस्ट्र ...और पढ़ें

    कारोबारी ने मौजा बदलकर करा ली जमीन की रजिस्ट्री
    कारोबारी ने मौजा बदलकर करा ली जमीन की रजिस्ट्री

    HighLights

    1. बिहिया में जमीन खरीद-बिक्री में हो रहा बड़ा बड़ा खेल
    2. जमीन से जुड़े कारोबारियों द्वारा की जा रही राजस्व चोरी

    संवाद सूत्र, बिहिया। बिहिया में भूमि खरीद-बिक्री के कारोबार से जुड़े कारोबारियों की मिलीभगत से अजीबो-गरीब कारनामे किए जा रहे है। ऐसे ही एक कारनामे में एक कारोबारी ने राजस्व चोरी के उद्देश्य से मौजा बदल कर न केवल जमीन रजिस्ट्री करा ली, बल्कि हैरत इस बात की है कि उसने उस जमीन का अंचल कार्यालय से दाखिल-खारिज भी करा लिया।

    13 लाख रुपये जमा करने का नोटिस

    अब मामला पकड़ में आने के बाद जिला अवर निबंधन कार्यालय आरा से नोटिस भेज कर जमीन कारोबारी फिरोज अंसारी को 13,79,230 रुपये जमा करने को कहा गया है। नोटिस में कहा गया है कि आपके पक्ष में निबंधित दस्तावेज सं.11084/14,अंचल बिहिया, मौजा धरहरा,थाना नं 141,खाता 564,खेसरा 28,रकबा 62.5 डिसमिल है।

    दाखिल-खारिज भी कराया

    परिवादी अविनाश कुमार शर्मा का आवेदन तथा विभागीय पत्रांक के आलोक में सीओ बिहिया से प्राप्त जांच प्रतिवेदन में कहा गया है कि सिविल कोर्ट में दायर वाद सं.20/15 में पारित सुलहनामा के आधार पर मौजा बिहिया, थाना नं 147 के अंतर्गत खाता 564,खेसरा 28,रकबा 62.5 डिसमिल दाखिल-खारिज किया गया है।

    नोटिस में कहा गया है कि उक्त अवलोकन से स्पष्ट है कि आपके द्वारा न्यायालय की आदेश की आड़ में निबंधित दस्तावेज से इतर जमाबंदी कायम कराया गया है, जिसमें राजस्व चोरी की मंशा स्पष्ट है।

    जानकारी के अनुसार संबंधित जमीन कारोबारी ने बिहिया मौजा में स्थित जमीन को धरहरा मौजा में दिखाकर जमीन की रजिस्ट्री करा ली। बाद में भूलवश ऐसा हो गया कह कर कोर्ट में एक वाद दाखिल कर दिया।

    फिर सुलहनामा के आधार पर आदेश पारित कराकर दाखिलज-खारिज भी करा लिया और लाखो रुपये राजस्व बचाने का प्रयास किया। उक्त सारे हथकंडों में रजिस्ट्री कार्यालय से लेकर अंचल कार्यालय तक कि भूमिका पर सवाल उठ रहा है।

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