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    भरत तिवारी के गांव में कटाव पीड़ितों की मदद तेज, मिट्टी भराई से घर बनाने की राह आसान

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 08:16 PM (IST)

    गंगा कटाव से विस्थापित जवइनिया गांव के 70 परिवारों के पुनर्वास के लिए बिलौटी गांव में भूमि समतलीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। जिला प्रशासन की निगरान ...और पढ़ें

    बिलौटी गांव में मिट्टी भराई का काम जारी। फोटो जागरण

    बिलौटी गांव में मिट्टी भराई का काम जारी। फोटो जागरण

    HighLights

    1. जवइनिया गांव के 70 कटाव पीड़ित परिवारों का पुनर्वास।

    2. बिलौटी गांव में आवंटित भूमि का समतलीकरण कार्य जारी।

    3. जिला प्रशासन की देखरेख में आवास निर्माण की तैयारी।

    पंचायत सूत्र, बिलौटी (शाहपुर)। गंगानदी के कटाव से विस्थापित जवइनिया गांव के पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। भरत तिवारी के बिलौटी गांव के दक्षिणी हिस्से में कटाव पीड़ितों को आवंटित भूमि को रहने योग्य बनाने के लिए गड्ढेनुमा स्थानों पर युद्धस्तर पर मिट्टी भराई एवं समतलीकरण का कार्य कराया जा रहा है।

    कार्य की मानिटरिंग की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन को सौंपी गई है। शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश लगातार स्थल का निरीक्षण कर समतलीकरण कार्य की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन का प्रयास है कि जिन कटाव पीड़ित परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत भूमि का पर्चा मिल चुका है।

    उन्हें मकान निर्माण के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए जेसीबी एवं अन्य मशीनों की मदद से गड्ढों को भरकर जमीन को समतल किया जा रहा है।

    आवास निर्माण का सपना होगा पूरा

    गौरतलब है कि शाहपुर प्रखंड के जवइनिया गांव के 70 कटाव पीड़ित परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत बिलौटी गांव के दक्षिणी भाग स्थित सरकारी भूमि पर प्रति परिवार तीन-तीन डिसमिल जमीन आवंटित की गई है। 

    हालांकि आवंटित भूमि का कुछ हिस्सा गड्ढेनुमा होने के कारण वहां तत्काल मकान निर्माण संभव नहीं था। इसे लेकर कटाव पीड़ित परिवार लगातार प्रशासन से जमीन का समतलीकरण कराने की मांग कर रहे थे।

    कटाव पीड़ितों की मांग को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने समतलीकरण का कार्य शुरू कराया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कार्य पूरा होते ही लाभुक परिवार अपने नए आशियाने का निर्माण शुरू कर सकेंगे। इससे वर्षों से विस्थापन का दंश झेल रहे परिवारों को स्थायी आवास की दिशा में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

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