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    बक्सर-कोइलवर तटबंध के गैप भरने में नई अड़चन, आयोग ने लौटाया 56 करोड़ का प्रस्ताव

    Updated: Sun, 26 Jul 2026 03:18 PM (IST)

    बक्सर-कोइलवर गंगा तटबंध के गैप भरने का 56 करोड़ का प्रस्ताव राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने तकनीकी प्रावधानों के कारण लौटा दिया है। अब संशोधित डी ...और पढ़ें

    मरचइया डेरा के पास गंगा तटबंध में गैप। जागरण

    मरचइया डेरा के पास गंगा तटबंध में गैप। जागरण

    HighLights

    1. 56 करोड़ का तटबंध गैप भरने का प्रस्ताव लौटाया गया।

    2. राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने तकनीकी संशोधन सुझाए।

    3. संशोधित डीपीआर से 75 गांवों को बाढ़ सुरक्षा मिलेगी।

    दिलीप कुमार ओझा, शाहपुर (आरा)। दियरांचल क्षेत्र से होकर गुजरने वाले बक्सर-कोइलवर गंगा सुरक्षा तटबंध के अधूरे गैप को भरने की योजना फिलहाल राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग की टिप्पणियों के कारण अटक गई है।

    करीब 56 करोड़ रुपये की लागत से तैयार प्राक्कलन को आयोग ने कुछ अतिरिक्त तकनीकी प्रावधान जोड़ने की सलाह के साथ राज्य सरकार को लौटा दिया है।

    अब विभागीय अभियंता संशोधित विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने में जुटे हैं। इसके बाद प्रस्ताव को दोबारा स्वीकृति के लिए आयोग के पास भेजा जाएगा।

    DPR भेजी गई थी प्रशासनिक मंजूरी के लिए 

    बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल के अनुसार, मरचइया डेरा और लक्षुटोला पंचायत के राजपुर के समीप तटबंध में वर्षों से बने दो बड़े गैप को भरने के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया गया था।

    तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद इसे प्रशासनिक मंजूरी के लिए भेजा गया और फिर भारत सरकार के राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग को अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया गया।

    आयोग ने अध्ययन के बाद कुछ अतिरिक्त तकनीकी प्रावधान शामिल करने की टिप्पणी करते हुए प्रस्ताव वापस कर दिया।

    विभागीय अभियंताओं ने बताया कि गैप वाले स्थानों की मिट्टी की भार वहन क्षमता (लोड बेयरिंग कैपेसिटी) की जांच के लिए नमूने दिल्ली स्थित केंद्रीय मृदा एवं सामग्री अनुसंधानशाला भेजे गए थे।

    उसी रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार किया गया था। अब आयोग की टिप्पणियों के अनुरूप संशोधन कर समेकित प्रस्ताव दोबारा भेजा जाएगा।

    गैप भरने पर खर्च होंगे 14 करोड़ 

    मरचइया डेरा गांव के समीप 53.90 से 54.18 किलोमीटर के बीच लगभग 280 मीटर तथा राजपुर के समीप 64.37 से 64.55 किलोमीटर के बीच करीब 180 मीटर का गैप है।

    ये गैप पहले स्लूइस गेट के निर्माण के उद्देश्य से छोड़े गए थे। वर्तमान में गंगा की मुख्य धारा इन स्थानों से लगभग ढाई से तीन किलोमीटर उत्तर दिशा में बह रही है।

    विभाग के अनुसार, मरचइया गैप को भरने पर करीब 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जहां तीन स्लूइस गेट लगाए जाएंगे। वहीं राजपुर गैप को भरने पर लगभग 42 करोड़ रुपये की लागत आएगी और यहां नौ स्लूइस गेट स्थापित किए जाएंगे।

    दोनों स्थानों पर गेट के ऊपर आवागमन के लिए पासवे भी बनाया जाएगा। बाढ़ के दौरान गेट बंद कर पानी के प्रवेश को रोका जाएगा, जबकि आवश्यकता पड़ने पर इन्हें खोलकर जल निकासी की जा सकेगी।

     तैयार की जा रही संशोध‍ित र‍िपोर्ट 

    तटबंध सड़क के रूप में भी कार्य करेगा, जिससे दियरांचल का मुख्यालय से संपर्क हर मौसम में बना रहेगा। वर्ष 2023 में तत्कालीन विधायक राहुल तिवारी ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद विभाग ने इस योजना का डीपीआर तैयार कराया।

    कार्यपालक अभियंता कन्हैया सिंह ने कहा क‍ि, बक्सर-कोइलवर गंगा तटबंध के दोनों गैप को भरने के लिए तैयार प्राक्कलन राष्ट्रीय गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग ने कुछ अतिरिक्त प्रावधान जोड़ने की टिप्पणी के साथ लौटाया है। संशोधित प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही पुनः स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।"

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    75 गांवों को मिलेगा सीधा लाभ

    तटबंध का अधूरा कार्य पूरा होने पर बहोरनपुर, सुहियां, लालू डेरा, गौरा, करजा, डुमरिया, हरिहरपुर, बरिसवन, सेमरिया, झौवां-बेलवनिया, प्रसौंडा, सरना, भरौली और सहजौली पंचायत समेत करीब 75 गांवों की लगभग डेढ़ लाख आबादी को बाढ़ से बेहतर सुरक्षा मिलेगी।

    साथ ही करीब 15 हजार एकड़ कृषि योग्य भूमि पर होने वाली खेती भी बाढ़ के दुष्प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित हो सकेगी।