भरत तिवारी के घर पहुंचे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान; घुटनों के बल बैठकर दी श्रद्धांजलि, पोछे मां के आंसू
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भोजपुर के बिलौटी गांव पहुंचकर भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। ...और पढ़ें
HighLights
चिराग पासवान ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की।
उन्होंने घुटनों के बल बैठकर तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित की।
गृह मंत्री अमित शाह से एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच मांगी।
पंचायत सूत्र, करनामेपुर (शाहपुर)। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में शुक्रवार को नया राजनीतिक मोड़ आ गया।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बिलौटी गांव पहुंचे और भरत तिवारी के स्वजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी।
बिहार सरकार के मंत्री संजय सिंह, पूर्व एमएलसी हुलास पांडेय समेत अन्य नेताओं के साथ गांव पहुंचते ही चिराग पासवान ने भरत भूषण तिवारी की तस्वीर पर घुटनों के बल बैठकर पुष्पांजलि अर्पित की।
इसके बाद उन्होंने भरत की मां के पास बैठकर उन्होंने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और न्याय दिलाने का भरोसा दिया।
भरत की मां की आंखों से छलकते आंसुओं को देख वह भी भावुक हो गए। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और कानून के राज को हर हाल में कायम रखने की बात कही।

(भरत तिवारी की मां से बात करते लोजपा सुप्रीमो सह केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, कृषि मंत्री संजय सिंह व पूर्व एमएलसी हुलास पांडे।)
चिराग पासवान ने कहा कि भरत तिवारी की मौत को लेकर प्रशासन के कुछ अधिकारियों पर जिस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह बेहद गंभीर है।
यदि जांच में कोई भी अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर होती है, यदि वही कानून अपने हाथ में लेने लगें तो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा।
किसी भी व्यक्ति, चाहे वह अधिकारी ही क्यों न हो, को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण किया था तो पुलिस को उसे गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी।
किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार जिस स्तर की जांच की मांग करेगा, उसे सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जाएगा ताकि न्याय मिल सके।
एक बार फिर सीएम को देंगे जानकारी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस मामले को लेकर उनकी मुख्यमंत्री से बातचीत हुई है और सरकार निष्पक्ष कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी पूरे घटनाक्रम पर चर्चा कर चुके हैं।
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तथा एक बार फिर मुख्यमंत्री को मामले की विस्तृत जानकारी देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप हैं। उन्हें पुरस्कृत करना उचित नहीं है और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए सरकार आवश्यक कदम उठाएगी।
मौके पर यामिनी रंजन मिश्रा, जिलाध्यक्ष राजेश्वर पासवान सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।
पहले गृह मंत्री से उठाया था मामला
करनामेपुर पहुंचने से एक दिन पहले ही चिराग पासवान ने अमित शाह से मुलाकात के दौरान भरत तिवारी एनकाउंटर का मुद्दा उठाया था।
उन्होंने राजगीर में दो युवकों की हत्या के मामले की भी चर्चा करते हुए दोनों घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने और पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय दिलाने का आग्रह किया था।
इस मुलाकात की जानकारी उन्होंने स्वयं अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की थी। गृह मंत्री के साथ उनकी तस्वीर भी थी।

'सरेंडर के बाद गोली मारना गलत'
गुरुवार को पटना पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने भरत तिवारी एनकाउंटर पर खुलकर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो उसके बाद गोली चलाना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने यह भी कहा कि भरत तिवारी के पास से बरामद बताए गए हथियार की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। चिराग पासवान के इस बयान के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
सत्ता और विपक्ष दोनों के निशाने पर मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं अब सत्ता पक्ष के सहयोगी दल की ओर से भी निष्पक्ष जांच की मांग किए जाने के बाद मामले ने नया राजनीतिक आयाम ले लिया है।
17 जून को हुआ था एनकाउंटर
गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर पुलिस ने भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर किया था। गंभीर रूप से घायल भरत को इलाज के लिए पीएमसीएच भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए और इसे फर्जी एनकाउंटर बताया। मामले ने तूल पकड़ने के बाद संबंधित एसडीपीओ, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
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