तनाव दूर कराने जा रहे थे, जाम ने और बढ़ा दिया टेंशन; मानसिक अस्पताल मार्ग पर ट्रकों का कब्जा
कोईलवर स्थित बिहार के एकमात्र मानसिक अस्पताल तक पहुंचने में मरीजों और परिजनों को ट्रकों के कारण भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। इससे इलाज के लिए आन ...और पढ़ें

जाम में फंसा अस्पताल का रास्ता
HighLights
ट्रकों की बेतरतीब पार्किंग से अस्पताल मार्ग पर जाम।
मरीजों को पैदल चलकर अस्पताल पहुंचना पड़ रहा।
प्रशासन से जाम मुक्त मार्ग बनाने की मांग।
पंचायत सूत्र, जमालपुर (भोजपुर)। कोईलवर स्थित बिहार के एकमात्र मानसिक अस्पताल तक पहुंचना इन दिनों मरीजों और उनके परिजनों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है।
अस्पताल जाने वाली सड़क पर ट्रकों की बेतरतीब पार्किंग और घंटों लगने वाले जाम ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि इलाज के लिए आने वाले लोगों को पहले ट्रैफिक की परीक्षा देनी पड़ रही है।
जाम में फंसा अस्पताल का रास्ता
बुधवार को मानसिक अस्पताल मोड़ के पास ट्रकों की लंबी कतार लग जाने से करीब डेढ़ से दो घंटे तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा।
सड़क पर दोनों ओर भारी वाहनों के खड़े रहने से अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह तो पैदल चलने तक की जगह नहीं बची थी।
मरीजों को बीच रास्ते उतारना पड़ा
स्थिति इतनी खराब हो गई कि कई परिजनों को ऑटो और अन्य वाहनों से मरीजों को बीच रास्ते में ही उतारना पड़ा।
इसके बाद वे मानसिक रोगियों को लेकर पैदल अस्पताल पहुंचे। बाहर से आए परिजनों का कहना था कि सड़क पर ट्रकों की ऐसी अव्यवस्था थी कि छोटे वाहन तो दूर, पैदल निकलना भी मुश्किल हो गया था।
12 किलोमीटर का सफर बना चार घंटे की परेशानी
छपरा, सिवान और पटना से आए कई मरीजों के परिजनों ने बताया कि बबुरा-कोईलवर मानसिक अस्पताल मार्ग पर लगे जाम के कारण 12 किलोमीटर की दूरी तय करने में चार घंटे तक लग गए।
इलाज के लिए पहले से परेशान मरीजों और उनके परिवारों की मुश्किलें सड़क जाम ने और बढ़ा दीं।
डॉक्टरों ने भी उठाए सवाल
बिहार मानसिक स्वास्थ्य एवं सहबद्ध विज्ञान संस्थान (बिमहास) के चिकित्सकों ने भी सड़क व्यवस्था पर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि कोईलवर चौक से अस्पताल तक जाने वाली सड़क पर हर दिन ट्रकों की लंबी कतार लगी रहती है।
इससे डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचने में दिक्कत होती है।
नो-एंट्री का नियम भी बेअसर
मानसिक अस्पताल मोड़ के पास ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई है, लेकिन ट्रक चालक खुद ही बैरिकेड हटाकर वाहनों को खड़ा कर देते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार पुलिस गश्ती वाहन भी इस अव्यवस्था को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं, जिससे समस्या लगातार बनी हुई है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग
स्थानीय लोगों, मरीजों के परिजनों और अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह केवल ट्रैफिक जाम का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
बिहार के इकलौते मानसिक अस्पताल तक पहुंचने में यदि मरीजों को घंटों जाम में फंसना पड़े, तो इसका सीधा असर इलाज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ता है।
लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर इस मार्ग को जाम मुक्त बनाने की मांग की है।