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    भूमिहीन किसान हरेराम महतो ने नर्सरी से रची सफलता की कहानी; भोजपुर में पट्टे की जमीन पर कमा रहे लाखों रुपये

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:46 PM (IST)

    भूमिहीन किसान हरेराम महतो ने शाहपुर, भोजपुर में पट्टे की जमीन पर सब्जियों की उन्नत नर्सरी तैयार कर लाखों रुपये कमाए हैं। उनकी नर्सरी की मांग भोजपुर और ...और पढ़ें

    सब्जी की नर्सरी में किसान हरेराम महतो। जागरण

    सब्जी की नर्सरी में किसान हरेराम महतो। जागरण

    HighLights

    1. भूमिहीन हरेराम महतो ने नर्सरी से लाखों कमाए।

    2. पट्टे की ढाई एकड़ जमीन पर करते हैं खेती।

    3. ताइवानी पपीता नर्सरी की सर्वाधिक मांग है।

    दिलीप कुमार ओझा, शाहपुर (आरा)। जमीन अपनी नहीं, लेकिन हौसला अपना है। इसी जज्बे के दम पर शाहपुर के भूमिहीन किसान हरेराम महतो आज सब्जियों की उन्नत नर्सरी तैयार कर किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

    पिछले तीन दशकों से आधुनिक तकनीक और पारंपरिक खेती के बेहतर समन्वय से हरेराम इस सीजन में केवल सब्जियों की नर्सरी बेचकर ही लाखों रुपये की कमाई कर चुके हैं।

    तैयार सब्जियों को शाहपुर, करनामेपुर, बिहिया, ब्रह्मपुर सहित कई अन्य लोकल बाजारों में बेचा जाता है। उनकी तैयार की गई नर्सरी की मांग भोजपुर ही नहीं, बल्कि पड़ोसी बक्सर जिले सहित कई प्रखंडों के हजारों किसानों के बीच बनी हुई है।

    ढाई एकड़ पट्टे की जमीन ने बदली तकदीर

    फिलहाल उनके खेतों में भिंडी और नेनुआ की फसल तैयार है। जबकि टमाटर, मिर्च, ताइवानी पपीता, बैंगन और फूलगोभी की उन्नत नर्सरी बिक्री के लिए तैयार है।

    सुबह से ही किसान उनके खेत पर पहुंचकर नर्सरी खरीद रहे हैं। हरेराम बताते हैं कि इस बार मौसम अनुकूल रहने से सब्जियों की खेती का रकबा बढ़ा है।

    इसका सीधा लाभ नर्सरी की बिक्री पर भी देखने को मिल रहा है। हरेराम की माने तो सब्जियो की नर्सरी तैयार करने में मौसम के उतार चढ़ाव के चुनौतियों का सामना भी करना पड़ता है। 

    ताइवानी पपीते की डिमांड ज्यादा 

    हरेराम के अनुसार ताइवानी पपीता की नर्सरी की सबसे अधिक मांग है। इसकी विशेषता यह है कि लगाए गए सौ पौधों में से 95 से 97 पौधे जीवित रह जाते हैं, जिससे किसानों का जोखिम काफी कम हो जाता है।

    वहीं बैंगन की विभिन्न प्रजातियों के करीब डेढ़ लाख से अधिक पौधे इस सीजन में किसान खरीद चुके हैं। फूलगोभी की कई उन्नत किस्मों की मांग भी लगातार बढ़ रही है।

    उन्होंने बताया कि इस वर्ष सामान्य वर्षा और बाढ़ जैसे हालात नहीं बनने से टमाटर की नर्सरी की बिक्री पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हुई है।

    किसानों की बदलती जरूरतों को देखते हुए इस बार उन्होंने पहली बार शिमला मिर्च की भी खेती शुरू की है, जिसे अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। भूमिहीन होने के बावजूद हरेराम शाहपुर मठिया में करीब ढाई एकड़ जमीन पट्टे पर लेकर खेती करते हैं।

    इसके लिए उन्हें हर वर्ष एक लाख रुपये से अधिक का पट्टा देना पड़ता है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। खेती के हर काम में उनकी पत्नी, पुत्र नारायण महतो और सहयोगी श्याम सुंदर सिंह कुशवाहा कंधे से कंधा मिलाकर साथ देते हैं।

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    बक्सर से भोजपुर तक हरेराम की नर्सरी की धूम

    सुबह पौ फटने से पहले पूरा परिवार खेतों में पहुंच जाता है और देर शाम तक मेहनत में जुटा रहता है। हरेराम महतो वर्षों से किसानों को उन्नत सब्जियों की खेती के लिए प्रेरित करते रहे हैं।

    उनकी नर्सरी से तैयार पौध लेकर हजारों किसान अच्छी आमदनी कर रहे हैं। यही कारण है कि हर सीजन में किसान उनकी नर्सरी का इंतजार करते हैं।

    भोजपुर आत्मा के परियोजना उपनिदेशक राणा राजीव रंजन ने बताया कि हरेराम महतो आधुनिक तकनीक और पारंपरिक खेती का सफल समावेश कर बेहतर उत्पादन और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। ऐसे प्रगतिशील किसान दूसरे किसानों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।