Nautapa 2026: सूर्य देव का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश, 8 जून तक भयंकर तपेगी धरती; खेती के लिए बढ़िया समय
सूर्य 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जो 8 जून तक रहेगा, इस अवधि को नवतपा कहा जाता है। यह समय कृषि कार्यों, विशेषकर खरीफ फसलों और धान की बु ...और पढ़ें

नौतपा की शुरुआत 25 मई से। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड
HighLights
सूर्य 25 मई को रोहिणी नक्षत्र में, 8 जून तक रहेगा।
खरीफ फसलों, धान की बुवाई के लिए श्रेष्ठ समय।
खेतों की जुताई से कीट व खरपतवार नष्ट होते हैं।
जागरण संवाददाता, उदवंंतनगर। Nautapa 2026 Dateइस वर्ष 25 मई को कृतिका नक्षत्र से सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 8 जून तक रहेंगे। उसके बाद मृग शिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
रोहिणी नक्षत्र कृषि और ज्योतिष के लिए उत्तम माना जाता है। आमतौर पर रोहिणी नक्षत्र को खरीफ फसल की शुभारंभ के लिए उत्तम माना जाता है।
वैज्ञानिक तकनीकी और पारंपरिक तरीकों को मिलाकर किसान गुणवत्तापूर्ण ज्यादा फसल उत्पादन कर सकते हैं। रोहिणी नक्षत्र में धान का विचार डालने से फसल पोस्ट और निरोध होता है तथा 7% खेती सफल होने की उम्मीद होती है।
8 जून तक तपेगी धरती
पंडित गणेश पांडेय और पंडित विवेकानंद पांडेय ने बताया कि इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र का आगमन 25 मई सोमवार की रात्रि 8.21.बजे होगा, जो 8 जून की रात 7.40 बजे तक रहेगा।
उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र आकाश मंडल के 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है। इसके स्वामी चंद्रमा है।
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही भीषण गर्मी वाला प्रथम 9 दिन की अवधि नवतपा कहलाता है। कहते हैं नवतपा जितना तपता है मानसून उतना ही अच्छा होता है।
खेती की शुरुआत के लिए श्रेष्ठतम नक्षत्र
खरीफ फसल की शुरुआत रोहिणी नक्षत्र से की जाती है। इस नक्षत्र में खेती करने से फसल की गुणवत्ता अच्छी होती है। धान का बिचड़ा डालने डालने का यह श्रेष्ठतम समय है।
यह नक्षत्र मक्का और सब्जियों की बुवाई के लिए बेहतर माना जाता है। अगात व लंबी अवधि की फसल की बुआई के लिए यह सबसे बेहतर समय होता है।
रोहिणी नक्षत्र में करें खेतों की जुताई
जेठ महीने में सूरज की रोशनी धरती पर तीखी पड़ती है। रोहिणी नक्षत्र भी जेठ महीने में शुरू होता है। वैसे में खेतों की गहन जुताई का यह श्रेष्ठतम समय माना जाता है।
जोगिंदर ओझा, विनोद ओझा, रामबचन सिंह और चंद्रमा सिंह जैसे किसान बताते हैं कि रोहिणी नक्षत्र में खेत की जुताई का बड़ा महत्व है। इस महीने में खेत की जुताई से खेतों में लगे खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। गर्मी की चपेट में आने से शत्रु कीट मर जाते हैं और फफूंद नष्ट हो जाते हैं। जहरीले जंतुओं का प्रभाव भी कम हो जाता है।
सूरज का ताप मिट्टी को उर्वर बना देती है जिससे अच्छी फसल होने की उम्मीद रहती है। कृषि कार्य खास कर धान की खेती के लिए रोहिणी नक्षत्र महत्वपूर्ण माना गया है।
धान का बिचड़ा गिराने का सबसे बेहतर समय
रोहिणी नक्षत्र का आगमन 25 मई से हो रहा है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार खरीफ की नई फसल उत्पादन के लिए रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालना सबसे बेहतर होता है। इससे फसल अगात होती है।
लंबी अवधि की धान की पैदावार के लिए रोहिणी नक्षत्र का बिछड़े बेहतर विकल्प है। बिचड़े पुष्ट और निरोग होते हैं। कम वर्षा होने से बिचडों में जल जमाव नहीं होता है जिससे बिचडे सड़ने की आशंका कम रहती है।