खेती-किसानी के लिए वरदान है रोहिणी नक्षत्र, खरीफ फसलों की शुरुआत के लिए सबसे शुभ समय शुरू
सूर्य देव 25 मई को कृतिका से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं, जो 8 जून तक रहेगा। यह नक्षत्र खरीफ फसलों, विशेषकर धान की खेती के लिए अत्यंत शुभ माना ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड तस्वीर
HighLights
रोहिणी नक्षत्र 25 मई से 8 जून तक रहेगा।
धान के बिचड़े डालने का उत्तम समय।
नवतपा से मिट्टी उर्वर, कीट नियंत्रण होता है।
जागरण संवाददाता, उदवंंतनगर। रोहिणी नक्षत्र में खेती की शुरुआत को शुभ माना जाता है। इस वर्ष 25 मई की रात सूर्य देव कृतिका नक्षत्र से रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किए और 8 जून तक रहेंगे। उसके बाद मृग शिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। रोहिणी नक्षत्र कृषि और ज्योतिष के लिए उत्तम माना जाता है।
आमतौर पर रोहिणी नक्षत्र को खरीफ फसल की शुभारंभ के लिए उत्तम माना जाता है। वैज्ञानिक, तकनीकी और पारंपरिक तरीकों को मिलाकर किसान गुणवत्तापूर्ण ज्यादा फसल उत्पादन कर सकते हैं। रोहिणी नक्षत्र में धान का बिचड़ा डालने से फसल पुष्ट और निरोग होता है तथा शत प्रतिशत खेती सफल होने की उम्मीद होती है।
नवतपा जितना तपता है मानसून उतना ही अच्छा होता
पंडित दिनेश पांडेय व पंडित विवेकानंद पांडेय ने बताया कि इस वर्ष रोहिणी नक्षत्र का आगमन 25 मई सोमवार की रात्रि 8.21.बजे हुआ जो 8 जून की रात 7.40 बजे तक रहेगा। उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार रोहिणी नक्षत्र आकाश मंडल के 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है। इसके स्वामी चंद्रमा है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के साथ ही भीषण गर्मी वाला प्रथम 9 दिन की अवधि नवतपा कहलाता है। कहते हैं नवतपा जितना तपता है मानसून उतना ही अच्छा होता है।
खबरें और भी
खेती की शुरुआत के लिए श्रेष्ठतम नक्षत्र
खरीफ फसल की शुरुआत रोहिणी नक्षत्र से की जाती है। इस नक्षत्र में खेती करने से फसल की गुणवत्ता अच्छी होती है। धान का बिचड़ा डालने डालने का यह श्रेष्ठतम समय है। यह नक्षत्र मक्का और सब्जियों की बुवाई के लिए बेहतर माना जाता है।अगात व लंबी अवधि की फसल की बुआई के लिए यह सबसे बेहतर समय होता है।
रोहिणी नक्षत्र में करें खेतों की जुताई
जेठ महीने में सूरज की रोशनी धरती पर तीखी पड़ती है। रोहिणी नक्षत्र भी जेठ महीने में शुरू होता है। वैसे में खेतों की गहन जुताई का यह श्रेष्ठतम समय माना जाता है।
जोगिंदर ओझा, विनोद ओझा, रामबचन सिंह, चंद्रमा सिंह जैसे किसान बताते हैं कि रोहिणी नक्षत्र में खेत की जुताई का बड़ा महत्व है। इस महीने में खेत की जुताई से खेतों में लगे खरपतवार नष्ट हो जाते हैं। गर्मी की चपेट में आने से शत्रु किट मर जाते हैं तथा फफूंद नष्ट हो जाते हैं। जहरीले जंतुओं का प्रभाव भी कम हो जाता है।
सूरज का ताप मिट्टी को उर्वर बना देती है जिससे अच्छी फसल होने की उम्मीद रहती है। कृषि कार्य खास कर धान की खेती के लिए रोहिणी नक्षत्र महत्वपूर्ण माना गया है।
धान का बिचड़ा गिराने का सबसे बेहतर समय
रोहिणी नक्षत्र का आगमन 25 मई से हो गया है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार खरीफ की नई फसल उत्पादन के लिए रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा डालना सबसे बेहतर होता है। इससे फसल अगात होती है । लंबी अवधि की धान की पैदावार के लिए रोहिणी नक्षत्र का बिचड़ा बेहतर विकल्प है।
बिचड़े पुष्ट और निरोग होते हैं। कम वर्षा होने से बिचड़ों में जल जमाव नहीं होता है जिससे बिचड़े सड़ने की आशंका कम रहती है।धान की फसल में खखड़ी कम होता है।
नवतपा शुरू
रोहिणी नक्षत्र के प्रथम नव दिन को नवतपा कहा जाता है।इस दौरान सूर्य की किरणें धरती पर सीधे पड़ता है जिससे भीषण गर्मी का प्रभाव रहता है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार नवतपा जितना तपता है मानसून उतना मेहरबान होता है। नवतपा तपने से खेतों की मिट्टी उर्बरा हो जाती है तथा कीट पतंगों का प्रभाव कम हो जाता है।