बिहार में दियारा के लोग जहरीला पानी पीने को मजबूर, ₹150 करोड़ खर्च करने के बाद भी नहीं मिली आर्सेनिक से मुक्ति
सिमरी प्रखंड में 150 करोड़ की पेयजल परियोजना फेल होने से लोग आर्सेनिक युक्त दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ...और पढ़ें

टैंकर से बिक रहा गैर प्रमाणित पानी। फोटो जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, सिमरी (बक्सर)। सिमरी प्रखंड के लोगों को आर्सेनिक युक्त प्रदूषित पेयजल से राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है।
क्षेत्र में पेयजल की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है, जिससे आम जनजीवन पर गहरा असर पड़ रहा है। सरकारी स्तर पर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से केशोपुर में बहुग्रामी पेयजलापूर्ति केंद्र स्थापित किया गया था।
इस योजना से उम्मीद थी कि प्रखंड के दर्जनों गांवों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिलेगा, लेकिन व्यवस्थागत खामियों और लापरवाही के कारण यह योजना अपने प्रारंभिक चरण में ही पटरी से उतरती दिखाई दे रही है।
दूसरी ओर प्रखंड के करीब 90 प्रतिशत सरकारी और निजी चापाकलों से आर्सेनिक मिश्रित दूषित पानी निकल रहा है। यह पानी न केवल पीने योग्य नहीं है, बल्कि लंबे समय तक इसके सेवन से गंभीर बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।
मजबूरी में लोग बाजार से 20 रुपये प्रति गैलन की दर से पानी खरीदकर पी रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च अतिरिक्त बोझ साबित हो रहा है, जबकि कई गरीब परिवार आज भी दूषित पानी पीने को विवश हैं।
बिना जांच के बिक रहा पानी
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बाजार में बिकने वाले पानी की भी कोई ठोस गुणवत्ता जांच नहीं हो रही है। बिना किसी प्रमाणित परीक्षण के पानी की आपूर्ति धड़ल्ले से की जा रही है, जिससे लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस गंभीर समस्या के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं, जिसके कारण हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रदूषित पानी के लगातार सेवन से इलाके में त्वचा रोग, पेट से जुड़ी बीमारियां, जोड़ों में दर्द और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से फैल रही हैं।
खासकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर इसका अधिक दुष्प्रभाव देखने को मिल रहा है। कई परिवारों ने बताया कि घर में एक न एक सदस्य किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा है, जिसका मुख्य कारण दूषित पानी ही है।
ग्रामीणों का कहना है कि बहूग्रामीय पेयजलापूर्ति योजना अगर सही तरीके से संचालित की जाए और इसकी नियमित निगरानी हो, तो इस समस्या से काफी हद तक निजात मिल सकती है।
इसके लिए जरूरी है कि जलापूर्ति केंद्र को पूरी क्षमता के साथ चालू किया जाए, पाइपलाइन की खामियों को दूर किया जाए और हर स्तर पर पारदर्शिता बरती जाए। साथ ही, जल की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और मानक से कम गुणवत्ता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
यदि समय रहते इसे गंभीरता से नहीं लिया गया तो आगे आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। फिलहाल सिमरी प्रखंड के लोग शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं और सरकारी दावों की सच्चाई जमीन पर कहीं नजर नहीं आ रही है।
क्या कहते हैं ग्रामीण?
दियारे के ज्यादातर चापाकलों से पीला और बदबूदार पानी निकलता है। मजबूरी में हमलोग 20 रुपये में पानी खरीदकर पीते हैं। गरीब परिवारों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल हो गया है। कई लोग अब भी वही दूषित पानी पी रहे हैं, जिससे गांव में बीमारियां बढ़ती जा रही हैं। प्रशासन को इस पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। - प्रमोद कुमार मिश्र, केशोपुर
घर के बच्चों को बार-बार पेट दर्द और त्वचा की समस्या हो रही है। डॉक्टर भी साफ पानी पीने की सलाह देते हैं, लेकिन यहां शुद्ध पानी मिलना मुश्किल है। खरीदकर पानी लेना हर दिन संभव नहीं होता। सरकार ने जो योजना बनाई थी, वह सही से चलती तो हमें यह परेशानी नहीं होती। - सोनू द्विवेदी, सिमरी
पानी के केन की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। लोग मजबूरी में खरीद रहे हैं। लेकिन यह भी चिंता की बात है कि बिकने वाले पानी की गुणवत्ता की कोई जांच नहीं होती। इससे लोगों की सेहत पर और खतरा बढ़ सकता है। इस पर नियंत्रण जरूरी है। - मुन्ना ठाकुर, आशा पड़री
यह सिर्फ पानी की समस्या नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य का बड़ा संकट है। करोड़ों खर्च के बावजूद लोगों को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, तभी हालात सुधरेंगे। - जितेन्द्र दूबे, पांडेयपुर
आर्सेनिक युक्त पानी का लगातार सेवन बेहद खतरनाक है। इससे त्वचा रोग, पेट की बीमारियां, लीवर व किडनी संबंधी समस्याएं तथा कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है। खासकर बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में यथासंभव शुद्ध और जांचा हुआ पानी ही पीना चाहिए - डॉ. संतोष कुमार, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, सिमरी
धरती के अंदर 100 फीट तक ही आर्सेनिक पानी में घुला हुआ है। उसके बाद पानी साफ है। इसलिए चापाकल लगाते समय इसका ध्यान रखना चाहिए। कुछ तकनीकी कारणों से केशोपुर में स्थापित बहुग्रामी पेयजलापूर्ति केंद्र से कुछ इलाकों में पानी की आपूर्ति बाधित है, लेकिन उसे जल्द ठीक करने का प्रयास जारी हैं। - राहुल कुमार, कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग