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    BJP में बड़ा बवाल: बक्सर के 25 में से 11 मंडल अध्यक्षों ने दिया इस्तीफा; अब प्रदेश नेतृत्व की भूमिका पर टिकी नजर

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 01:55 PM (IST)

    बक्सर में भाजपा की जिला इकाई में आंतरिक कलह सामने आई है, जहां 25 में से 11 मंडल अध्यक्षों ने जिलाध्यक्ष पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया ...और पढ़ें

    बक्सर में बीजेपी का संगठनात्मक संकट। सांकेतिक तस्वीर

    बक्सर में बीजेपी का संगठनात्मक संकट। सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. बक्सर भाजपा में 11 मंडल अध्यक्षों ने इस्तीफा दिया।

    2. जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन पर तानाशाही का आरोप।

    3. प्रदेश नेतृत्व के फैसले पर टिकी सभी की निगाहें।

    जागरण संवाददाता, बक्सर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की बक्सर जिला इकाई में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के 25 मंडलों में से 11 मंडल अध्यक्षों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

    इन मंडल अध्यक्षों ने 30 जून को ही प्रदेश अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र भेज दिया था, लेकिन बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को देखते हुए इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया गया।

    उपचुनाव संपन्न होने के बाद अब सभी 11 मंडल अध्यक्षों के त्यागपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने से पार्टी के अंदर चल रही खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

    जिलाध्यक्ष के खिलाफ लगाई आरोपों की झड़ी 

    प्रदेश अध्यक्ष को संबोधित अपने त्यागपत्र में मंडल अध्यक्षों ने जिला भाजपा अध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि जिलाध्यक्ष द्वारा संगठन में मनमानी एवं तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

    उनके अनुसार मंडलों में गुटबाजी का माहौल तैयार किया जा रहा है और कार्यकर्ताओं एवं पदाधिकारियों को सम्मान नहीं मिल रहा है। मंडल अध्यक्षों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें कई मौकों पर अपमानित किया गया। 

    इसके कारण वे संगठन में अपने दायित्वों का निर्वहन करने में खुद को असहज महसूस कर रहे हैं। इसी आधार पर उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष से उनका त्यागपत्र स्वीकार करने का आग्रह किया है।

    हालांकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार इन मंडल अध्यक्षों का त्यागपत्र अभी तक प्रदेश नेतृत्व द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है। इसके बावजूद संगठन ने संबंधित मंडलों में पार्टी का कामकाज सुचारु रूप से संचालित करने के लिए एक-एक संयोजक मनोनीत कर दिया है। 

    जिलाध्यक्ष बोले-दबाव बनाने की राजनीति 

    इधर, जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश भुवन ने मंडल अध्यक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए इसे दबाव बनाने की राजनीति बताया है।

    उनका कहना है कि मंडलों में संयोजक मनोनीत किए जाने के बाद पार्टी का काम पहले की अपेक्षा बेहतर तरीके से हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि हाल में हुए 'मन की बात' कार्यक्रम और डिजिटल प्रशिक्षण में बक्सर भाजपा का प्रदर्शन राज्य स्तर पर टॉप टेन में रहा है।

    मंडल अध्यक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि मंडल अध्यक्षों के माध्यम से कोई उन पर निशाना साधने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर दबाव की राजनीति करार देते हुए कहा कि इससे संगठन में कुछ हासिल होने वाला नहीं है। 

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    प्रशिक्षण वर्ग का भी किया था बहिष्कार 

    भाजपा में मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्ष के बीच चल रही खींचतान का यह पहला मामला नहीं है। पिछले दिनों पार्टी की ओर से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग को लेकर भी असंतोष सामने आया था।

    बताया जाता है कि इस्तीफा देने वाले सभी मंडल अध्यक्षों ने प्रशिक्षण वर्ग का न केवल विरोध किया, बल्कि उसका बहिष्कार भी किया था। उस समय भी पार्टी के अंदर इसको लेकर चर्चा तेज हुई थी।

    तब संगठन की ओर से इसे लेकर सार्वजनिक तौर पर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आने दिया गया। हालांकि अब त्यागपत्र सार्वजनिक होने के बाद पार्टी के अंदर चल रही खींचतान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। 

    इन मंडल अध्यक्षों ने दिया है इस्तीफा 

    जिन 11 मंडल अध्यक्षों ने प्रदेश अध्यक्ष को त्यागपत्र भेजा है, उनमें नगर अध्यक्ष बक्सर पश्चिमी अजय कुमार वर्मा, सोनवर्षा मंडल अध्यक्ष पिंकू चौबे, नियाजीपुर मंडल अध्यक्ष अशीत लाल, बहन मंडल अध्यक्ष उदय उज्जैन, कोरान सराय मंडल अध्यक्ष धर्मेंद्र पांडेय, चक्की मंडल अध्यक्ष विनोद उपाध्याय, पांडेयपट्टी मंडल अध्यक्ष अजय भट्ट, बक्सर ग्रामीण मंडल अध्यक्ष दीपक सिंह, चौसा मंडल अध्यक्ष प्रकाश राय, डुमरी मंडल अध्यक्ष वंशीधर पांडेय और चौसा नगर मंडल अध्यक्ष सविता देवी शामिल हैं। 

    सामूहिक इस्तीफे से संगठन में मची हलचल 

    एक साथ 11 मंडल अध्यक्षों के त्यागपत्र ने भाजपा के जिला संगठन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। मंडल अध्यक्ष पार्टी के जमीनी संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी माने जाते हैं।

    ऐसे में एक साथ बड़ी संख्या में मंडल अध्यक्षों के पद छोड़ने और जिलाध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाने से संगठन के भीतर मतभेद की स्थिति स्पष्ट तौर पर सामने आई है।

    हालांकि जिलाध्यक्ष इसे दबाव की राजनीति बता रहे हैं और संगठन के कार्यक्रमों में बेहतर प्रदर्शन का हवाला दे रहे हैं। अब निगाहें प्रदेश नेतृत्व के रुख पर टिकी हैं।

    फिलहाल त्यागपत्र स्वीकार नहीं किए जाने और दूसरी ओर संबंधित मंडलों में संयोजक नियुक्त किए जाने से यह मामला और पेचीदा हो गया है। आने वाले दिनों में प्रदेश नेतृत्व इस पूरे प्रकरण को किस तरह सुलझाता है और मंडल अध्यक्षों के त्यागपत्र पर क्या निर्णय लेता है, इस पर भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिक हलकों की भी नजर है।