बक्सर जिले के ब्रह्मपुर में भूमि सर्वे तेज, 90 मौजा का सीमांकन पूरा; बिहार-यूपी सीमा पर चुनौती
ब्रह्मपुर अंचल में भूमि सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है, जिसमें अब तक 90 मौजा की सीमा का निर्धारण और सत्यापन हो चुका है। ...और पढ़ें

बक्सर जिले के ब्रह्मपुर में भूमि सर्वे तेज, 90 मौजा का सीमांकन पूरा; बिहार-यूपी सीमा पर चुनौती (AI Generated Image)

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संवाद सहयोगी, ब्रह्मपुर (बक्सर)। विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त विभाग द्वारा ब्रह्मपुर अंचल में भूमि सर्वेक्षण का कार्य तेज गति से शुरू कर दिया गया है।
विभाग द्वारा अब तक अंचल में कुल 90 मौजा के सीमा का निर्धारण कर उसका सत्यापन भी कर दिया गया है, लेकिन बिहार और यूपी के सीमावर्ती क्षेत्र में 20 मौजों के सत्यापन अभी नहीं हुआ है। इसके बाद दूसरे चरण में अब खाता खेसरा नंबर की जांच पड़ताल कर सत्यापन का कार्य शुरू किया गया है।
ब्रह्मपुर में भूमि समस्या सबसे जटिल है और 1970 के सर्वे में भी आठ मौजे का सर्वेक्षण नहीं होने से भूमि संबंधी अभिलेख काफी पुराने हैं, लेकिन सर्वेक्षण कार्य शुरू होते ही यहां के रैयतों ने काफी उत्साह दिखाया।
यहां के अंचल कार्यालय मे मनमानी के कारण ही जमीन बंटवारे का अभिलेख अपडेट नहीं होने से लगभग 56 हजार ही जमाबंदी है। अब भूमि सर्वेक्षण शुरू होते ही अभी तक विभाग में लगभग 75 हजार रैयतों द्वारा ऑफलाइन और ऑनलाइन खाता, खतियान और बंटवारा आदि में सुधार के लिए आवेदन दिया है।
विभागीय जानकारी के अनुसार, अंचल में कुल 110 मौजा है। सर्वेक्षण विभाग के अधिकारियों द्वारा कुल 90 मौजा का सत्यापन कर ग्राम और बस्ती की सीमा तय कर दी है। ताकि उसके सीमा क्षेत्र को लेकर किसी तरह का कोई विवाद न हो। इसके साथ ही त्रिसीमना (जहां तीन मौजा और दो गांव की सीमा रेखा मिलती है) का भी सीमांकन कर दिया गया है।
दूसरे चरण में विभाग द्वारा किश्तवार का कार्य चल रहा है। इस कार्य के तहत खाता और खेसरा का सत्यापन किया जाएगा। विभागीय जानकारी के अनुसार, चकनी नव बरार और चौबे चक नमक दो मौजों के सत्यापन का कार्य भी पूरा हो गया है।
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बंदोबस्त पदाधिकारी सुधांशु सिंह ने बताया कि शेष 16 मौजा में खाता खेसरा के सत्यापन का कार्य एक साथ शुरू किया गया है। इस कार्य में खेतों का मानचित्र तैयार किया जाएगा और उसी आधार पर स्वामित्व का अभिलेख तैयार किया जाता है। लेकिन स्वामित्व के लिए किसानों के कागजातों की भी जांच पड़ताल की जाएगी।
सीमा क्षेत्र के 20 मौजे का नहीं हुआ सत्यापन
बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के 20 मौजे का अभी तक सत्यापन नहीं किया गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमा विवाद में भी कुछ मौजे फंसे हुए थे। इन मौजों के भूमि अभिलेख काफी पुराने हैं और कुछ मौजे का सर्व 1970 में भी नहीं हुआ था। 1995 में भी शुरू हुआ सर्वे का काम अधूरा रह गया।
कुछ मौजे ऐसे भी हैं, जहां पर 1910 के सर्वे के आधार पर स्वामित्व कायम है और इसमें कई पीढ़ियां के बाद हिस्से को तय करना काफी जटिल काम है। बंदोबस्त पदाधिकारी बताते हैं कि इसके लिए मार्गदर्शन की मांग की गई है।
चिकनी में स्वामित्व को लेकर उलझा मामला
चकनी मौजा में खाता का सत्यापन तो कर दिया गया, लेकिन उस मौजा का चकबंदी विभाग द्वारा चक फाइनल होने के बाद भूमि पर स्वामित्व का मामला पहले से ही उलझा हुआ है। रैयतों का खतियान तो बन गया है, लेकिन विभाग द्वारा नक्शा नहीं बनाया गया।
खतियान के स्वामित्व और भूमि कब्जे में काफी अंतर है। सर्वे अधिकारी का कहना है कि रैयतों के कागजात का पूरी तरह से अवलोकन के बाद ही वहां पर स्वामित्व का निर्धारण किया जाएगा।
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