पीपा पुल हटने से बक्सर-बलिया की बढ़ी दूरी, दियारा क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भारी दिक्कत
मानसून के आगमन और गंगा में जलस्तर बढ़ने के कारण बक्सर-बलिया के बीच के पीपा पुल हटा दिए गए हैं। इससे दियारा क्षेत्र के निवासियों को बलिया पहुंचने में अ ...और पढ़ें
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पीपा पुल। फाइल फोटो
HighLights
मानसून में गंगा का जलस्तर बढ़ने से पीपा पुल हटाए गए।
दियारा क्षेत्र के लोगों को बलिया पहुंचने में भारी परेशानी हो रही है।
स्थायी पुल या वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था की मांग की गई।
संवाद सहयोगी, सिमरी (बक्सर)। गंगा में जलस्तर बढ़ने और मानसून के आगमन के साथ हर वर्ष 15 जून के बाद बड़की नैनीजोर में बिहार सरकार तथा छोटका राजपुर–माल्देपुर के बीच उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए पीपा पुलों को सुरक्षा कारणों से हटा दिया जाता है।
पुल हटने के बाद दियारा क्षेत्र के लोगों की आवाजाही पूरी तरह जनेश्वर मिश्र सेतु पर निर्भर हो जाती है। इससे बलिया और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने की दूरी कई किलोमीटर बढ़ जाती है। साथ ही यात्रा में अधिक समय और अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।
पीपा पुल चालू रहने पर दियारा के दर्जनों गांवों के किसान, छात्र, मजदूर, छोटे कारोबारी और नौकरीपेशा लोग आसानी से बलिया पहुंच जाते थे। पुल बंद होने के बाद उन्हें पहले जनेश्वर मिश्र सेतु तक लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे रोजाना आने-जाने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी किसानों को होती है।
दियारा में पैदा होने वाली सब्जियां, दूध और अन्य कृषि उत्पाद समय पर बलिया की मंडियों तक नहीं पहुंच पाते, जिससे कई बार उचित कीमत नहीं मिलती। वहीं खाद, बीज और कृषि उपकरण लाने में भी अधिक समय और परिवहन खर्च लगता है। छोटे व्यापारियों की बिक्री प्रभावित होती है और मजदूरों की दैनिक आय पर भी असर पड़ता है।
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स्कूल जाने में छात्रों को होती है परेशानी
उमेश उपाध्याय, रिंकू सिंह सहित कई अन्य लोगों ने बताया कि बलिया के विद्यालयों, महाविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को प्रतिदिन अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। वहीं इलाज के लिए बलिया जाने वाले मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी भी बढ़ जाती है।
आपातकालीन स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना चुनौती बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से मानसून में पीपा पुल हटाना जरूरी है, लेकिन दियारा क्षेत्र की बड़ी आबादी की सुविधा को देखते हुए स्थायी पुल या वैकल्पिक संपर्क व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
उनका मानना है कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक हर वर्ष बरसात के मौसम में दियारा के लोगों को लंबी दूरी, अधिक खर्च और समय की परेशानी झेलनी पड़ेगी।
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