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    बक्सर शहर का बढ़ने वाला है दायरा! कई गांव होंगे नगर परिषद में शामिल, तैयार हो रहा नक्‍शा

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:52 AM (GMT+05:30)

    बक्सर नगर परिषद के परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे शहर का दायरा बढ़ेगा और कई ग्रामीण क्षेत्र इसमें शामिल होंगे। इससे वार्डों की संख्या बढ़ने ...और पढ़ें

    बक्‍सर नगर परिषद का होगा सीमा विस्‍तार। फाइल

    बक्‍सर नगर परिषद का होगा सीमा विस्‍तार। फाइल

    HighLights

    1. बक्सर नगर परिषद के नए परिसीमन की प्रक्रिया शुरू।

    2. शहर का दायरा बढ़ेगा, कई ग्रामीण क्षेत्र शामिल होंगे।

    3. शामिल क्षेत्रों में शहरी सुविधाओं का विस्तार होगा।

    जागरण संवाददाता, बक्सर। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के निर्देशों के आलोक में नगर परिषद क्षेत्र के पुनर्गठन और नए सिरे से सीमा निर्धारण (परिसीमन) की प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

    विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे 30 अगस्त तक विस्तृत नक्शे, थाना नंबर, आबादी और चौहद्दी के साथ परिसीमन का अंतिम प्रस्ताव अनिवार्य रूप से सौंप दें।

    इसके लिए विस्तारित बक्सर नगर परिषद का एक नक्शा तैयार किया जा रहा है। प्रस्ताव जमा होने के बाद प्रारूप अधिसूचना जारी होगी और आम लोगों को दावों व आपत्तियों के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा।

    यह पूरी कवायद वर्ष 2026 के अंत में होने वाले बिहार त्रिस्तरीय पंचायत आम चुनावों से पहले पूरी की जानी है, ताकि प्रभावित ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन समय पर किया जा सके।

    इसी बीच, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर इंटरनेट के माध्यम से नगर विकास विभाग द्वारा तैयार कराया गया एक प्रस्तावित नक्शा तेजी से प्रसारित हो रहा है।

    ये गांव होंगे नप में शामिल 

    इस नक्शे में खुटहा, मझरिया, अर्जुनपुर, रामोबरिया, दहिबर, गड़नी, दलसागर, तिवारीपुर, परसिया, शिवपुर, हरिकिशुनपुर, नदांव, पड़री, साहोपारा, गंगौरा, चुरामनपुर, दरहपुर, शेरपुर, जगदीशपुर, पंडितपुर, सोंधिला, इजरी, हुकहा, रहसीचक, लालगंज, बटवा, मनौवरचक, सरांव, लरई, हरिपुर, उमरपुर, गोबिनापुर, पुलिया, बलिया, लक्ष्मीपुर और मिश्रवलिया जैसे गांवों को भी नगर परिषद में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है

    इस नक्शे की सत्यता को दैनिक जागरण प्रमाणित नहीं करता है, लेकिन इसका विरोध शुरू हो गया है। इस नक्शे में बक्सर सदर प्रखंड के लगभग 80 से 90 प्रतिशत हिस्से को शामिल किया गया है।

    वर्तमान में 42 वार्डों वाले बक्सर नगर परिषद में इससे पूर्व हुए परिसीमन के दौरान अहिरौली, जासो, नुआंव और पांडेयपट्टी जैसे नजदीकी ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया था।

    इस बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क किए जाने पर कार्यपालक अधिकारी ऋत्विक कुमार ने फोन रिसीव नहीं किया।

    नागरिकों की आजीविका के आधार पर होता है निर्धारण

    ''बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007'' के तहत यह देखा जाता है कि संबंधित क्षेत्र में कृषि में लगे मजदूरों/किसानों की संख्या कुल कार्यबल के 50 प्रतिशत से कम होनी चाहिए।

    अर्थात 50% से अधिक आबादी गैर-कृषि गतिविधियों जैसे व्यापार, मजदूरी या नौकरियों में संलग्न हो। बक्सर के आसपास जिन गांवों को शामिल करने का प्रस्ताव है, प्रशासन को यह प्रमाणित करना होगा कि वे 50 प्रतिशत गैर-कृषि कार्यबल के नियम को पूरा करते हैं।

    शहरीकरण को रफ्तार देने की नीति

    बिहार सरकार की इस व्यापक नीति के पीछे राज्य में शहरीकरण की दर को तेजी से बढ़ाने का रणनीतिक उद्देश्य छिपा है।

    वर्ष 2020 के कानूनी संशोधनों के बाद राज्य में 116 से अधिक नई नगरपालिकाओं का गठन और दर्जनों निकायों का विस्तार किया गया, जिससे बिहार की शहरी आबादी 11.3% से बढ़कर 15.75% से अधिक हो चुकी है।

    सरकार की कोशिश है कि राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यावसायिक केंद्रों से सटे हाट-बाजारों को शहरी निकायों में लाकर केंद्रीय एवं राज्य वित्त आयोग से अधिक विकास फंड हासिल किया जाए।

    नगर निकाय में जुड़ने से बेहतर होंगी सुविधाएं

    नगर परिषद का हिस्सा बनते ही इन इलाकों में सुनियोजित बुनियादी ढांचे का विकास होगा। ग्रामीणों को कच्ची नालियों और हैंडपंपों के बजाय पक्की सड़कें, भूमिगत ढकी नालियां, प्रति व्यक्ति 135 लीटर के हिसाब से नल का शुद्ध जल और आधुनिक एलईडी स्ट्रीट लाइटें मिलेंगी।

    ठोस कचरा प्रबंधन नियमावली के तहत घर-घर से गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक उठाव शुरू होगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बेघर और गरीब परिवारों को पक्के मकान के लिए 2.5 लाख तक की बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी, जो ग्रामीण आवास योजना से अधिक है।

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    जेब पर बढ़ जाएगा आर्थिक बोझ

    नगर परिषद में शामिल होते ही होल्डिंग टैक्स, प्रापर्टी टैक्स, जल कर और व्यावसायिक परिसरों पर भारी शहरी शुल्क लागू हो जाएंगे।

    किसानों के लिए चिंता यह है कि नगर निकाय में आने के बाद राज्य की कृषि सब्सिडी, डीजल अनुदान, और पीएम-किसान योजना का लाभ लेने में कानूनी व प्रशासनिक अड़चनें आएंगी।

    इसके अतिरिक्त, अपनी ही जमीन पर मकान बनाने के लिए ग्रामीणों को ''बिहार भवन उप-विधि'' के तहत पंजीकृत आर्किटेक्ट से नक्शा स्वीकृत कराना होगा और विकास शुल्क चुकाना होगा, जिसके बिना किया गया निर्माण अवैध घोषित कर दिया जाएगा।