मोबाइल, नरकंकाल और डीएनए रिपोर्ट; ऐसे सुलझी 20 महीने पुरानी गुत्थी, बक्सर में पिता ने किया रेलकर्मी का श्राद्ध
ब्रह्मपुर के रेलकर्मी विमल कुमार की 20 महीने पुरानी गुमशुदगी डीएनए रिपोर्ट से सुलझ गई है, जिसमें उनके नरकंकाल की पहचान हुई। पिता ने श्राद्ध कर पुलिस क ...और पढ़ें

डीएनए जांच से हुई रेलकर्मी के शव की पुष्टि।
HighLights
रेलकर्मी विमल कुमार की 20 महीने पुरानी गुमशुदगी डीएनए से सुलझी।
रामगढ़ में मिले नरकंकाल का डीएनए विमल के परिवार से मिला।
पिता ने पुलिस कार्यशैली पर सवाल उठाए, हत्या की आशंका जताई।
संवाद सहयोगी, ब्रह्मपुर (बक्सर)। परमहंस प्रसाद के बेटे विमल कुमार की गुमशुदगी के मामले का लगभग 20 महीने के बाद पटाक्षेप हो गया है।
लगभग इतने ही समय पहले एक अज्ञात शव के कंकाल से डीएनए मैच करने के बाद युवक की मौत की पुष्टि हो गई। इसके बाद पिता ने अपने पुत्र का श्राद्ध कर दिया।
ठाणे (मुंबई) रेलवे में ग्रुप डी पद पर कार्यरत ब्रह्मपुर निवासी विमल कुमार दिसंबर 2024 में रहस्यमय ढंग से लापता हो गए थे, जिसकी प्राथमिकी उनके जीजा दीपक कुमार ने 11 जनवरी 2025 को ठाणे रेल पुलिस में दर्ज कराई थी।
एक लड़की के पास मिला था मोबाइल
इसके बाद करीब आठ महीने तक युवक का कोई सुराग पुलिस या परिवार को नहीं मिला था। मामले में मोड़ तब आया, जब आठ अगस्त 2025 को सर्विलांस के आधार पर ठाणे पुलिस ने रामगढ़ से एक किशोरी के पास से विमल का मोबाइल बरामद किया।
किशोरी ने बताया कि उसे यह लावारिस मोबाइल छह माह पहले घास काटने के दौरान बधार में मिला था। मुंबई पुलिस और ब्रह्मपुर पुलिस ने ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के रामगढ़ गांव के बधार में घटनास्थल पर जाकर जांच की।
पाया कि 6 जनवरी 2025 को इसी स्थल से वन्य जीवों द्वारा क्षत-विक्षत किया गया एक अज्ञात युवक का नरकंकाल बरामद हुआ था। इसी आधार पर पुलिस को आशंका हुई कि संभवत: वह शव विमल का ही हो सकता है।
मोबाइल और नरकंकाल मिलने का स्थान एक ही होने के आधार पर पुलिस ने कंकाल की डीएनए जांच कराई और उनके परिवार के सदस्यों से इसका मिलान हो गया।
पुलिस की कार्यशैली पर परिवार ने उठाए सवाल
पुलिस अधीक्षक के आदेश पर पिता परमहंस प्रसाद को इसकी जानकारी दी गई। रिपोर्ट मिलते ही परिजनों की विमल के जीवित होने की उम्मीद समाप्त हो गई और पिता ने धार्मिक रीति-रिवाज से उनका श्राद्ध कर्म संपन्न किया।
खबरें और भी
विमल वहां किन परिस्थितियों में पहुंचे और उनकी मौत कैसे हुई, यह मामला अब भी पूरी तरह उलझा हुआ है। सेवानिवृत्त शिक्षक पिता ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है।
उन्होंने इसे साजिशन हत्या बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठाणे पुलिस द्वारा मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों को सौंपने के प्रस्ताव के बावजूद स्थानीय ब्रह्मपुर पुलिस प्रक्रियात्मक स्वीकृति का हवाला देकर महाराष्ट्र नहीं गई और न्याय के नाम पर केवल आश्वासन दे रही है।
दिलचस्प है कि इस मामले में गुमशुदगी की प्राथमिकी थाणे में, जबकि शव मिलने की प्राथमिकी ब्रह्मपुर थाने में हुई थी। दोनों में से किसी थाने की पुलिस मामले का उद्भेदन नहीं कर सकी है।
20 दिन पहले जानकारी मिलने पर किया श्राद्ध का निश्चय
करीब 20 दिन पहले इस केस की अनुसंधान अधिकारी खुशबू कुमारी और युवक के पिता परमहंस प्रसाद डीएनए की रिपोर्ट लेने पटना स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला एक साथ गए थे।
लिफाफे में बंद रिपोर्ट अनुसंधान अधिकारी को मिली थी। थानाध्यक्ष ने रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों से उन्हें अवगत कराया, इसके बाद उन्होंने पूरी तैयारी के साथ 28 जुलाई को श्राद्ध कर दिया।
ब्रह्मपुर थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार ने डीएनए की रिपोर्ट मैच होने की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मामले में पुलिस द्वारा गहन अनुसंधान शुरू कर दिया गया है और शीघ्र ही पूरे मामले का उद्भेदन कर दिया जाएगा।