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    सूखे की मार, 'स्प्रिंकलर' से पार: कम बारिश में भी धान की बंपर पैदावार का ये है कृषि वैज्ञानिक का अचूक मंत्र

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 02:47 PM (IST)

    बक्सर में वर्षा की कमी से धान की रोपनी प्रभावित हुई है, जिसके चलते कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को कम पानी में बेहतर उपज के लिए टपक और फव्वारा विधि अपन ...और पढ़ें

    कम बारिश में भी धान की बंपर पैदावार का ये है कृषि वैज्ञानिक का अचूक मंत्र (AI Generated Image)

    कम बारिश में भी धान की बंपर पैदावार का ये है कृषि वैज्ञानिक का अचूक मंत्र (AI Generated Image)

    HighLights

    1. बक्सर में वर्षा की कमी से धान की रोपनी प्रभावित हुई।

    2. टपक/फव्वारा विधि से 50% पानी की बचत संभव है।

    3. वैज्ञानिकों ने वैकल्पिक सिंचाई, मल्चिंग का सुझाव दिया।

    जागरण संवाददाता, बक्सर। वर्षा के अभाव में जिले में धान की रोपनी प्रभावित है। जिले में 98 हजार हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य तय है। इधर, जुलाई में 21 दिन बीत जाने के बाद भी मुश्किल से 32 प्रतिशत रोपनी पूरी हो पाई है।

    दरअसल, मानसून के देर से आने और आने के बाद भी पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान इंतजार में बैठे हैं। रविवार की 30 एमएम और सोमवार को 40 एमएम वर्षा होने के बाद रोपनी की रफ्तार में तेजी आई है।

    अब तक औसत से कम वर्षा होने के कारण कृषि विज्ञानियों ने सुझाव दिया है कि कम पानी में भी विभिन्न फसलों की बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है।

    इस संबंध में जानकारी देते हुए जिला कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विज्ञानी हरिगोविंद जायसवाल ने बताया कि इसके लिए किसानों को टपक विधि अथवा फव्वारा विधि का इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर होगा।

    उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों को अपने खेतों में एक विशेष प्रकार की पाइपलाइन बिछानी होती है, जिसके द्वारा सीमित मात्रा में पौधों के ऊपर पानी का छिड़काव होता रहता है, जिससे मिट्टी में नमी बनी रहे और पौधों की बढ़वार प्रभावित नहीं हो।

    इस यंत्र को स्प्रिंकलर कहते हैं। इसके लिए राज्य कृषि विभाग की ओर से स्प्रिंकलर की खरीद पर अनुदान का भी प्रविधान है। इसकी सहायता से किसान भाई 50 प्रतिशत तक पानी की सीधी बचत कर सकते हैं।

    क्या है टपक और फव्वारा विधि?

    यह एक विशेष प्रकार का यंत्र है, जिसे स्प्रिंकलर कहते हैं। पाइप में जब पानी आता है, तो पंप के दबाव से यह फव्वारे के रूप में खेत में लगी फसल पर ऊपर से पानी का छिड़काव करता है।

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    पानी सीधे पौधों की कोपलों में जाता है, जिससे उनकी जरूरत पूरी हो जाती हैं। साथ ही पानी की कुछ मात्र खेत की मिट्टी में भी नमी बनाए रखने का काम करती है, जिससे पौधों की वृद्धि सामान्य रूप से होती रहती है तथा कम पानी खर्च कर भी बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है।

    क्यारी बनाकर पौधों की रोपाई जरूरी

    इसके लिए धान के खेत को लगातार पानी से भरकर रखने के बदले वैकल्पिक गीला और सूखा सिंचाई विधि अपनाना बेहतर है, जिससे पानी की काफी अधिक बचत हो सकती है। इसका बेहतर लाभ उठाने के लिए जरूरी है कि क्यारी बनाकर पौधों की रोपाई की जाए।

    इसके साथ कृषि वैज्ञानिक ने सुझाव दिया कि खेत की सिंचाई तभी करें, जब मिट्टी की सबसे ऊपरी सतह पर हल्की दरारें दिखाई देने लगे। खेत में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए पौधों की कतारों के बीच सूखी घास, पुआल या प्लास्टिक शीट से ढक दें।

    यह नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मददगार होता है, साथ ही खरपतवार नियंत्रण में भी सहायक होता है।

    थोड़ी-थोड़ी मात्रा में तीन से चार बार में यूरिया डालें

    कृषि विज्ञानी ने बताया कि रोपनी के समय खेतों में एक ही बार में यूरिया की भारी मात्रा का प्रयोग करने से किसानों को बचना चाहिए। इसके बदले तीन से चार बार में यूरिया की थोड़ी-थोड़ी मात्रा करके दे सकते हैं। इस विधि से उर्वरक देने से भी उत्पादन पर कोई असर नहीं होगा।