बक्सर में बाढ़ का कहर: गंगा और कर्मनाशा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर, जनजीवन अस्त-व्यस्त
गंगा और कर्मनाशा नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण बक्सर जिले में बाढ़ की स्थिति ...और पढ़ें
HighLights
गंगा और कर्मनाशा नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
बक्सर के कई प्रखंडों में बाढ़ से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित।
प्रशासन द्वारा नावों का परिचालन और राहत कार्य जारी है।
जागरण संवाददाता, बक्सर। जिले में गंगा, कर्मनाशा, ठोरा, धर्मावती और कंचन नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार (4 सितंबर 2026) की सुबह 6:00 बजे बक्सर स्टेशन पर गंगा नदी का जलस्तर 60.50 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान (60.32 मीटर) से 18 सेंटीमीटर ऊपर है।

वहीं, चौसा के पास कर्मनाशा नदी का वर्तमान जलस्तर 62.23 मीटर तक पहुंच गया है, जो खतरे के निशान (60.39 मीटर) से 1.84 मीटर ऊपर बह रही है। इसके कारण निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है।
इस ताजा बढ़ोतरी के कारण जिले के ब्रह्मपुर, सिमरी, बक्सर और चौसा प्रखंड के कई तटवर्ती गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। चक्की, इटाढ़ी और राजपुर कुछ गांवों में भी बाढ़ का असर है।
बक्सर-मोहनिया राष्ट्रीय राज मार्ग पर बनारपुर गांव की पुलिया के पास, जनेश्वर मिश्र सेतु का संपर्क पथ, इटाढ़ी-अतरौना सड़क और रामपुर-तिवाय मार्ग पर बाढ़ का पानी बहने लगा है। इसके कारण कई गांवों का मुख्य रास्तों से संपर्क कट गया है और ग्रामीण नौकाओं पर निर्भर हैं।
निचले इलाकों के घरों में पानी घुस गया है। फसलें डूबने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है।
जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में 19 नावों का परिचालन, चौसा में पालीथीन शीट्स का वितरण, बक्सर-कोईलवर तटबंध की 24 घंटे निगरानी और नैनीजोर में बोट एम्बुलेंस व मेडिकल टीम तैनात की गई है।
अति-संवेदनशील स्थलों पर बैरिकेडिंग व लाल झंडे लगाकर लोगों को नदी की ओर न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
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