वैशाली के राघोपुर में बाढ़ से हाहाकार, 20 पंचायतों के 75 से अधिक गांव प्रभावित; तीन लाख की आबादी भगवान भरोसे
राघोपुर प्रखंड के 20 पंचायतों के 75 से अधिक गांव गंगा के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ की चपेट में हैं, ...और पढ़ें
HighLights
राघोपुर के 75 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में।
बिजली, पानी बंद, खाद्य संकट और आवागमन बाधित।
प्रशासन से राहत सामग्री और सामुदायिक किचन की मांग।
संवाद सूत्र, राघोपुर (वैशाली)। राघोपुर प्रखंड की 20 पंचायतों के करीब 75 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। पिछले कई दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से लोग भयभीत और चिंतित हैं।
बाढ़ के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल से लोगों का संपर्क भंग हो गया है। प्रखंड की मुख्य सड़क और ग्रामीण सड़कों पर नाव चल रही है।
बिजली विभाग द्वारा प्रखंड के सभी गांवों में विद्युत आपूर्ति बंद कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को बंद करने का आदेश दिया है। घरों में और आसपास बाढ़ का पानी घुसने से लोगों की दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्री खत्म होने के कगार पर है।
नाव, दवा और राशन की किल्लत
इमरजेंसी में आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। किसान जान जोखिम में डालकर पशुओं के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान चारा लाने को मजबूर हैं। पर्याप्त नाव की व्यवस्था नहीं होने से कठिनाई बढ़ गई है।
बिजली बंद होने से मोबाइल चार्जिंग में दिक्कत हो रही है, वहीं कई जगह टावर में पानी घुसने से मोबाइल टावर बंद हो गए हैं। जिला एवं स्थानीय प्रशासन के स्तर पर अब तक सिर्फ नाव की व्यवस्था की गई है।
कई दिन बीतने के बाद भी सूखा राशन, पॉलीथिन शीट, दैनिक उपयोग की सामग्री और इमरजेंसी दवाओं की व्यवस्था नहीं की गई है।

(राघोपुर में बाढ़ के पानी में घिरा घर।)
केला के थम और ट्यूब के सहारे आवागमन
स्थानीय लोगों के अनुसार गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। लोग अपने बच्चों और पशुओं को लेकर ऊंचे स्थानों पर जा रहे हैं। सरकारी स्तर पर नाव नहीं मिलने से लोग केला के थम, ट्यूब एवं निजी नाव का सहारा लेकर आवागमन कर रहे हैं।
रतजगा करने को मजबूर लोग
जिन परिवारों के पास कोई सहारा नहीं है, वे पानी में ही चौकी व मचान बनाकर जीवन गुजार रहे हैं। प्रखंड की मुख्य सड़क से लेकर ग्रामीण सड़कों पर आवागमन पूरी तरह बंद है।
करीब-करीब पूरी आबादी घर में कैद हो गई है। हाट-बाजार एवं सब्जी मंडी बंद होने से दैनिक उपयोग का सामान भी नहीं मिल पा रहा है। रात में घरों में पानी होने से सांप-बिच्छू का डर बना रहता है।
राघोपुर में बाढ़ के कारण पशुपालकों की बढ़ी मुश्किल
प्रखंड के 20 पंचायतों में लबालब पानी भरने से पशुपालकों में त्राहिमाम की स्थिति है। मवेशियों को चारा नहीं मिलने से दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ा है।
जो दूध हो रहा है, पशुपालक उसे औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर हैं। कई पंचायतों के पशुपालक ऊंचे स्थानों और मुख्य सड़कों पर शरण लिए हुए हैं। पशु चारे का भी घोर संकट बना हुआ है।
पिछले कई दिनों से बाढ़ की चपेट में राघोपुर प्रखंड के सभी गांव है, इसके बावजूद भी जिला प्रशासन आंचल प्रशासन के स्तर पर राहत सामग्री का वितरण नहीं किया गया है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं अंचल प्रशासन से सुखा राशन, पॉलीथिन शीट, ऊंचे स्थान पर मेडिकल पशु के लिए चारा वितरण, पशुओं के लिए दवा वितरण एवं प्रत्येक पंचायत में सामुदायिक किचन शुरू करने की मांग की।
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