अगस्त में भी शांत गंगा, बक्सर में 5 साल के सबसे निचले स्तर पर जलस्तर; 20 दिनों में महज 3.84 मीटर बढ़ोतरी
इस अगस्त में बक्सर में गंगा का जलस्तर पिछले पांच सालों के सबसे निचले स्तर पर है, जिससे जल संसाधन विशेषज्ञ और किसान चिंतित हैं। मध्य प्रदेश की सहायक नद ...और पढ़ें

बक्सर के रामरेखा घाट पर गंगा नदी का जलस्तर। जागरण
HighLights
बक्सर में गंगा का जलस्तर पांच साल के सबसे निचले स्तर पर।
अगस्त में भी गंगा और यमुना में नहीं दिख रहा उफान।
मध्य प्रदेश की सहायक नदियों में कम बारिश मुख्य कारण।
अशोक कुमार सिंह, बक्सर। हर साल अगस्त महीने में गंगा का जलस्तर अपने चरम पर पहुंच जाता था, लेकिन इस वर्ष अब तक गंगा का जलस्तर लगभग स्थिर बना हुआ है।
बक्सर से प्रयागराज तक गंगा और नैनी तक यमुना में कहीं भी उफान नहीं है। जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव जरूर हो रहा है, लेकिन इसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं दिख रही। यह स्थिति जल संसाधन विशेषज्ञों के साथ-साथ किसानों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।
2025 में खतरे के निशान से 40 सेमी ऊपर था गंगा का जलस्तर
पिछले वर्ष की तुलना करें तो 4 अगस्त 2025 को बक्सर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 60.32 मीटर से 39 सेंटीमीटर ऊपर 60.71 मीटर दर्ज किया गया था।
वहीं, 1 अगस्त 2026 को गंगा का जलस्तर महज 52.72 मीटर रहा, जो पिछले पांच वर्षों में इस तारीख का सबसे निचला स्तर है। गत वर्ष 1 अगस्त 2025 को गंगा का जलस्तर 59.75 मीटर था।
उसी साल 2 अगस्त को खतरे के निशान से मात्र 14 सेंटीमीटर नीचे 60.18 मीटर, 3 अगस्त को 60.43 मीटर तथा 4 अगस्त को बढ़कर 60.71 मीटर तक पहुंच गया था।
इसके मुकाबले 1 अगस्त 2024 को जलस्तर 54.98 मीटर, 2023 में 55.66 मीटर और 2022 में 57.27 मीटर दर्ज किया गया था। आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों की तुलना में इस वर्ष गंगा का जलस्तर सबसे कम है।
2026 में बक्सर से प्रयाग तक गंगा और नैनी में यमुना का जलस्तर स्थिर
आमतौर पर जुलाई की शुरुआत से ही गंगा के जलस्तर में तेजी से उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता था, लेकिन वर्ष 2026 में 12 जुलाई को जलस्तर 48.91 मीटर रहने के बाद इसमें बेहद धीमी गति से वृद्धि हुई।
लगभग 20 दिनों में जलस्तर केवल 3.84 मीटर बढ़कर 52.75 मीटर के आसपास पहुंचा और फिर लगभग स्थिर हो गया। उधर गाजीपुर, वाराणसी और प्रयागराज में भी गंगा की यही स्थिति बनी हुई है।
वहीं नैनी में यमुना का जलस्तर भी सामान्य बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश की पहाड़ी नदियां केन, बेतवा और चंबल में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण अब तक एक बार भी उफान नहीं आया है।
हर वर्ष इन्हीं नदियों के दबाव से यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ता है और उसके प्रभाव से गंगा भी उफान पर पहुंचती है। इस बार इन नदियों में पर्याप्त पानी नहीं आने से गंगा में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी।
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बक्सर में पांच वर्षों के दौरान गंगा का जलस्तर (मीटर)
| तिथि | 2022 | 2023 | 2024 | 2025 | 2026 |
|---|---|---|---|---|---|
| 31 जुलाई | 56.91 | 55.69 | 54.42 | 59.21 | 52.69 |
| 1 अगस्त | 57.27 | 55.66 | 54.98 | 59.75 | 52.72 |
| 2 अगस्त | 57.18 | 55.70 | 55.02 | 60.18 | 52.74 |