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    बक्सर में बिना गर्भधारण के दूध देने लगी बछिया; गांव में शुरू हो गई पूजा-अर्चना, डॉक्टर ने बताई असली वजह

    Updated: Mon, 06 Jul 2026 09:56 AM (IST)

    बक्सर के चौगाईं प्रखंड के ठोरी पांडेयपुर गांव में एक 18-20 महीने की बछिया बिना गर्भधारण किए दूध देने लगी है, जिसे ग्रामीण दैवीय चमत्कार मान रहे हैं। प ...और पढ़ें

    बछ‍िया को कामधेनु मान होने लगी है पूजा-अर्चना। जागरण

    बछ‍िया को कामधेनु मान होने लगी है पूजा-अर्चना। जागरण

    HighLights

    1. बक्सर में बिना गर्भधारण बछिया ने दूध देना शुरू किया।

    2. ग्रामीण इसे दैवीय चमत्कार और कामधेनु का स्वरूप मान रहे।

    3. पशु चिकित्सकों ने हार्मोनल असंतुलन को इसका कारण बताया।

    संवाद सहयोगी, चौगाईं (बक्सर)। प्रखंड के ठोरी पांडेयपुर गांव में एक अनोखी घटना इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां एक 18 से 20 माह की बछिया बिना गर्भधारण किए ही दूध देने लगी है।

    घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग बछिया को देखने पहुंच रहे हैं। कई ग्रामीण इसे दैवीय चमत्कार और कामधेनु का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। 

    पशु चिकित्सकों ने इसे हार्मोन असंतुलन से जुड़ी चिकित्सकीय स्थिति बताया है। पशुपालक संतोष यादव ने बताया कि उनकी बछिया ने अब तक न तो गर्भधारण किया है और न ही किसी बछड़े को जन्म दिया है।

    तीन-चार द‍िनों से लगातार नि‍कल रहा दूध 

    इसके बावजूद पिछले तीन-चार दिनों से उसके थनों से लगातार दूध निकल रहा है। शुरुआत में परिवार ने इसे सामान्य घटना समझा, लेकिन जब लगातार दूध आने लगा तो इसकी चर्चा पूरे इलाके में फैल गई।

    देखते ही देखते गांव और आसपास के क्षेत्रों से लोग बछिया को देखने पहुंचने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी घटना नहीं देखी।

    कई लोग इसे आस्था से जोड़कर बछिया की पूजा कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे देखने के लिए दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। गांव में यह घटना कौतूहल और चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

    वहीं, आरा (भोजपुर) के निवर्तमान पशु चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ. दिनकर कुमार ने बताया कि बिना गर्भधारण के बछिया का दूध देना कोई चमत्कार नहीं है।

    नियम‍ित रूप से निकालते रहें दूध 

    यह हार्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) का परिणाम हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को धार्मिक या चमत्कारी घटना मानने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय दृष्टिकोण से देखना चाहिए।

    उन्होंने पशुपालक को सलाह दी कि बछिया के थनों से नियमित रूप से दूध निकालते रहें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो उसे थनैला (मैस्टाइटिस) जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा बढ़ सकता है।

    साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हार्मोन असंतुलन के कारण निकल रहे दूध का सेवन मानव स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता। इसलिए पशुपालक को जल्द से जल्द पशु चिकित्सक से जांच कराकर आवश्यक उपचार कराना चाहिए।

    एक ओर जहां ग्रामीण इसे आस्था और चमत्कार से जोड़ रहे हैं, वहीं पशु चिकित्सकों की राय इस घटना को पूरी तरह चिकित्सकीय कारणों से जुड़ा मामला बताती है।