एक दशक से सिर्फ सपने देख रहा बक्सर रेलवे स्टेशन, संसद में खुली 'वर्ल्ड क्लास' दावों की पोल
रेल मंत्रालय के जवाब से स्पष्ट हुआ है कि बक्सर रेलवे स्टेशन का विश्व स्तरीय पुनर्विकास 'मास्टर प्लान' के चक्रव्यूह में फंसा है, जिसकी कोई निश्चित समय- ...और पढ़ें

एक दशक से सिर्फ सपने देख रहा बक्सर रेलवे स्टेशन
HighLights
बक्सर स्टेशन का विश्व स्तरीय पुनर्विकास मास्टर प्लान में अटका।
रेल मंत्रालय ने कार्य शुरू होने की समय-सीमा नहीं बताई।
पड़ोसी स्टेशनों का विकास तेज, बक्सर अभी भी पिछड़ा।
जागरण संवाददाता, बक्सर। संसद के मानसून सत्र में रेल मंत्रालय द्वारा दिए गए एक लिखित जवाब ने यह साफ कर दिया है कि बक्सर रेलवे स्टेशन को "विश्व स्तरीय" बनाने के बरसों पुराने दावों और वादों का हश्र फिलहाल फाइलों से आगे नहीं बढ़ सका है।
29 जुलाई को लोकसभा में स्थानीय सांसद सुधाकर सिंह द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि "अमृत भारत स्टेशन योजना" के तहत बक्सर स्टेशन के पुनर्विकास की मास्टर प्लानिंग जारी है। यह एक "पुनरावृत्त" प्रक्रिया है, जिसे अनुकूलित किया जा रहा है।
रेल मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि इस अनुकूलन चरण के लिए कार्य शुरू होने या पूरा होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं दी जा सकती। इससे स्पष्ट है कि बीते एक दशक से बक्सर को अत्याधुनिक स्टेशन बनाने के दावों को हकीकत बनने में अभी काफी देर है।
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व वाले बक्सर को 1999 की "मॉडल स्टेशन योजना" से लेकर 2009 की "आदर्श स्टेशन योजना" और अब 2022 की "अमृत भारत स्टेशन योजना" की सूचियों में हर बार प्रमुखता से जगह मिली।
2014 के बाद से तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और रेल अधिकारियों द्वारा बहुमंजिला स्टेशन, एस्केलेटर, एयर कनकर्स और पीपीपी मॉडल के तहत "विश्व स्तरीय हब" विकसित करने के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन हकीकत यह है कि बीते एक दशक में धरातल पर काम के नाम पर केवल मौजूदा फुट ओवर ब्रिज पर रैंप, प्लेटफार्मों का आंशिक विस्तार, पेयजल प्रणाली और प्रतीक्षालय जैसे वही सीमित बुनियादी काम ही हो सके हैं, जो किसी भी सामान्य स्टेशन पर नियमित रूप से होते हैं। वृहद पुनर्विकास का मुख्य टेंडर और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट लगातार संशोधनों के फेर में ही अटका रहा।
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पड़ोसी रेलवे स्टेशनों का हो रहा तीव्र विकास
संसदीय आंकड़ों से उजागर होता सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि जहां बक्सर का मास्टर प्लान अनिश्चितता की प्रक्रिया में अटका है, वहीं जिले के अपेक्षाकृत छोटे स्टेशनों डुमरांव, चौसा और रघुनाथपुर में विकास कार्य शुरू हो चुके हैं।
वहीं पड़ोसी जिलों की बात करें, तो बीते एक दशक में बलिया, गाजीपुर, दिलदारनगर और आरा जैसे रेलवे स्टेशनों का तीव्र विकास हुआ है। बक्सर के विकास के दावे एक दशक में सपने दिखाने से आगे नहीं बढ़ सके हैं।
प्रतीक्षालयों के विकास का आश्वासन
रेलवे ने सांसद को दिए जवाब में बताया है कि हाल के वर्षों में बक्सर में मौजूद फुट ओवर ब्रिज में रैंप का निर्माण और दिव्यांगजन के लिए यात्री सुविधाओं का काम पूरा कर लिया गया है।
वहीं, आने वाले समय के लिए प्रतीक्षालय, प्लेटफार्म की सतह, शौचालयों के सुधार तथा लाइन संख्या 1, 4 और 5 पर बैलास्टलेस ट्रैक बिछाने के कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है।
तीन योजनाओं में नाम, फिर भी नहीं हुआ काम
- 1999 की "मॉडल स्टेशन योजना"
- 2009 की "आदर्श स्टेशन योजना"
- 2022 की "अमृत भारत स्टेशन योजना"