बक्सर थर्मल पावर प्रोजेक्ट में देरी से बढ़ी लागत, बिहार को मिल रही महंगी बिजली
बक्सर स्थित एसजेवीएन की 1,320 मेगावाट ताप बिजली परियोजना समय और लागत विस्तार के कारण महंगी बिजली दे रही है, जिससे बिहार के ऊर्जा बजट पर अतिरिक्त दबाव ...और पढ़ें

बक्सर ताप बिजली परियोजना की देरी से बढ़ी लागत, बिहार को मिल रही महंगी बिजली
HighLights
बक्सर परियोजना की बिजली अन्य संयंत्रों से महंगी है।
समर्पित रेल कॉरिडोर न होने से कोयला ढुलाई महंगी।
परियोजना में देरी से लागत 13,756 करोड़ रुपये से अधिक।
जागरण संवाददाता, बक्सर। बिहार के ऊर्जा आत्मनिर्भरता को गति देने वाली चौसा (बक्सर) स्थित एसजेवीएन की 1,320 मेगावाट बक्सर ताप बिजली परियोजना समय और लागत विस्तार का उदाहरण बन गई है। इसका असर बिजली घर के दीर्घकालिक परिचालन पर पड़ सकता है।
पहली 660 मेगावाट इकाई से बिहार को मिल रही बिजली राज्य के अन्य कोयला आधारित संयंत्रों से महंगी है। एनटीपीसी के कहलगांव, बाढ़ और नवीनगर संयंत्रों से औसतन 3.50 से 4.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिलती है।
बक्सर से औसत क्रय मूल्य लगभग 5.20 से 5.40 रुपये प्रति यूनिट है। इससे एनबीपीडीसीएल और एसबीपीडीसीएल के ऊर्जा बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
ठंड के मौसम में मांग घटने पर कम करना पड़ता उत्पादन
मेरिट आर्डर डिस्पैच नियम के तहत एसएलडीसी सस्ते वेरिएबल कास्ट वाले संयंत्रों से पहले बिजली उठाता है। बक्सर की उच्च लागत के कारण इसे नीचे रखा जाता है। दिन में सौर ऊर्जा उपलब्ध होने पर उत्पादन कम करने या कमर्शियल बैक-डाउन का निर्देश मिलता है।
सीईआरसी नियमों के अनुसार बिना बिजली लिए भी डिस्कोम को लगभग 2.00 से 2.50 रुपये प्रति यूनिट फिक्स्ड कैपेसिटी चार्ज चुकाना पड़ता है।
कोयला ढुलाई के वैकल्पिक मार्ग के कारण भी बढ़ी लागत
बक्सर बिजली घर की बिजली महंगी होने का एक मुख्य कारण समर्पित रेल कॉरिडोर का निर्माण नहीं होना भी है। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से कोयला लाने के लिए यह नेटवर्क बनना था।
किसानों और जिला प्रशासन के बीच भूमि अधिग्रहण विवाद के कारण यह अधूरा है। कोयला मुख्य रेलवे लाइन और ट्रकों से सड़क मार्ग से आ रहा है। इससे भाड़ा सामान्य आकलन की अपेक्षा काफी अधिक हो जाता है।
14.84 किलोमीटर लंबा डेडीकेटेड रेल कॉरिडोर बनाने की योजना शुरू में बनी थी। जमीन अधिग्रहण में स्थानीय किसानों के विरोध के कारण बाद में रेलवे कॉरिडोर का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया। इसके लिए भूमि अधिग्रहण का काम बेहद सुस्त गति से चल रहा है।
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समर्पित रेल लाइन बन जाए, तो सुधरेंगे हालात
बिजली घर के लिए समर्पित रेल लाइन चालू होने पर ट्रक परिवहन बंद होगा। कोयले की लागत घटेगी। ईंधन लागत 2.80 से 3.00 रुपये प्रति यूनिट के आसपास आ जाएगी।
अगस्त 2026 में दूसरी 660 मेगावाट इकाई चालू होने पर फिक्स्ड कास्ट पूरे 1,320 मेगावाट में बंटेगा। लेवलाइज्ड टैरिफ औसतन स्वीकृत 4.19 रुपये प्रति यूनिट के दायरे में आने की उम्मीद रहेगी।
वर्ष 2013 की योजना, 2026 में भी अधूरी
वर्ष 2013 में बिहार सरकार और एसजेवीएन ने ‘बक्सर बिजली कंपनी’ के रूप में इसकी परिकल्पना की थी। प्राथमिक लक्ष्य 2015-16 तक पूरा करना था। जमीन अधिग्रहण, विनियामक मंजूरियों और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण परियोजना वर्षों तक अटकी रही।
मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 10,439.09 करोड़ रुपये के अनुमान के साथ मंजूरी दी।
निर्माण की समयसीमा जून-जुलाई 2023 तय हुई। लगातार देरी के कारण अब कुल लागत लगभग 13,756 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। अभी तक बिजली घर की दो में एक यूनिट ही उत्पादन शुरू कर सकी है।