बक्सर में पर्यावरण संरक्षण पर जोर, गंगा तट पर बनेगा बायोडायवर्सिटी पार्क; DM अधिकारियों को दिए ये निर्देश
डीएम साहिला की अध्यक्षता में बक्सर में जिला पर्यावरण और आर्द्रभूमि समितियों की बैठक हुई, जिसमें गंगा किनारे बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने के लिए भूमि चयन ...और पढ़ें

समाहरणालय सभाकक्ष में बैठक में मौजूद जिलाधिकारी एवं अन्य। सौजन्य - प्रशासन
HighLights
गंगा किनारे बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने का निर्देश।
कोलिया खाप को आर्द्रभूमि अधिसूचित करने की समीक्षा।
वायु-ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर जोर।
जागरण संवाददाता, बक्सर। जिला पदाधिकारी साहिला ने सोमवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में जिला पर्यावरण समिति एवं जिला आर्द्रभूमि समिति की संयुक्त बैठक की।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, हरित आवरण के विस्तार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, पौधारोपण तथा जिले की आर्द्रभूमियों के संरक्षण एवं विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के आलोक में गंगा नदी के तट पर बायोडायवर्सिटी पार्क की स्थापना के लिए शीघ्र उपयुक्त भूमि का चयन कर प्रस्ताव उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
साथ ही वन प्रमंडल, बक्सर के कार्यालय एवं आवासीय परिसर के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया।
निर्माण कार्यों में तेजी के निर्देश
जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठक में सिमरी प्रखंड स्थित कोलिया खाप (दाहा) को आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत अधिसूचित करने की प्रगति की समीक्षा की गई तथा सिमरी सीओ को आवश्यक भू-अभिलेख एवं नक्शा शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।
गोकुल जलाशय में सीएसएस-एनपीसीए योजना के तहत चल रहे संरक्षण एवं विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए परियोजना क्षेत्र का सीमांकन शीघ्र पूरा करने और आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने को कहा गया।
इसके अलावा प्रस्तावित रिसर्च सेंटर, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वेटरनरी अस्पताल, इको हट, कैंपिंग साइट, नेचर ट्रेल और वाच टावर के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
साथ ही आर्द्रभूमियों में जैव विविधता संरक्षण, पौधारोपण, अतिक्रमण नियंत्रण और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
वायु प्रदूषण पर रोक के निर्देश
वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख सड़कों पर नियमित जल छिड़काव, धूल नियंत्रण के प्रभावी उपाय अपनाने तथा नगर निकायों द्वारा कचरा जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण नियम, 2000 के तहत अस्पतालों, विद्यालयों एवं अन्य साइलेंस जोन में निर्धारित ध्वनि सीमा का कड़ाई से पालन कराने पर भी जोर दिया गया।
जिलाधिकारी ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी नगर निकायों को अवैध डंपिंग स्थलों की पहचान कर कार्रवाई करने, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित सूचनाएं जिला वेबसाइट पर प्रदर्शित करने तथा अनुपालन प्रतिवेदन बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जिन सरकारी परिसरों में 200 या उससे अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं, उनकी सूची वन विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वर्षाकाल में व्यापक पौधारोपण अभियान चलाया जा सके।
नगर निकाय क्षेत्रों में सिटी फॉरेस्ट विकसित करने तथा अवैध वृक्ष कटाई एवं अवैध आरा मिलों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने का भी निर्देश दिया गया।
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