Buxar News: जिंदा होकर भी 'मृत' घोषित, वृद्धा पेंशन की फाइल में गुम हो गईं शांति देवी की सांसें
बक्सर के डुमरांव में 80 वर्षीय शांति देवी को सरकारी रिकॉर्ड में 'मृत' घोषित कर दिया गया है, जिससे उनकी वृद्धा पेंशन बंद हो गई है। महादलित समुदाय से आन ...और पढ़ें

जिंदा होकर भी 'मृत' घोषित, वृद्धा पेंशन की फाइल में गुम हो गईं शांति देवी की सांसें

समय कम है?
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अनिल कुमार ओझा, डुमरांव (बक्सर)। नया भोजपुर वार्ड संख्या आठ की रहने वाली 80 वर्ष से अधिक उम्र की शांति देवी इन दिनों जिंदगी और सिस्टम के बीच सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही हैं। स्वर्गीय रामचंद्र चौधरी की विधवा शांति देवी के लिए वृद्धा पेंशन सहारा नहीं, बल्कि अब सबसे बड़ा टेंशन बन गया है। सरकारी फाइलों में उन्हें ‘मृत’ घोषित कर दिए जाने के कारण उनकी वृद्धा पेंशन बंद कर दी गई है।
महादलित समुदाय से आने वाली शांति देवी बेहद गरीब हैं। शरीर साथ नहीं देता, आंखों की रोशनी कमजोर हो चुकी है और चलने-फिरने में भी सहारे की जरूरत पड़ती है। ऐसे में वृद्धा पेंशन ही उनके जीवन का एकमात्र आधार था। लेकिन एक झटके में यह सहारा भी छिन गया।
वह बताती हैं कि जब पेंशन नहीं मिली, तो वे वार्ड पार्षद कन्हैया राम को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचीं। वहां पूछताछ के बाद पता चला कि विकास मित्र बृज कुमार द्वारा उन्हें मृत बताए जाने की रिपोर्ट दी गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पेंशन बंद कर दी गई। यह सुनते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
आज स्थिति यह है कि जिंदा शांति देवी को खुद के जीवित होने का प्रमाण लेकर पदाधिकारियों के चौखट पर दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है। कभी आधार कार्ड दिखाना पड़ता है, कभी जीवित प्रमाण पत्र, तो कभी किसी नए आवेदन की मांग वार्ड पार्षद कन्हैया राम कहते हैं कि शांति देवी न सिर्फ गरीब, बल्कि लाचार विधवा महिला हैं।
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क्या कहते हैं प्रखंड विकास पदाधिकारी?
शांति देवी का आवेदन प्राप्त हुआ है। इसकी जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गलती कहां से हुई है, इसकी पड़ताल की जा रही है। नवंबर माह तक पेंशन का भुगतान हुआ है। जल्द ही इसको सुधार कर पेंशन चालू कराया जाएगा। - संदीप कुमार पांडे, प्रखंड विकास पदाधिकारी, डुमरांव