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बक्सर में जीविका के सहयोग से आत्मनिर्भर बनीं कुसुम देवी, किराना दुकान से संवारा भविष्य

Published: Tue, 01 Sep 2026 05:09 PM (IST)

बक्सर की कुसुम देवी ने जीविका से जुड़कर आर्थिक तंगी दूर की और परिवार को सहारा दिया। उन्होंने 20 हजार ...और पढ़ें

बक्सर में जीविका के सहयोग से आत्मनिर्भर बनीं कुसुम देवी, किराना दुकान से संवारा भविष्य

बक्सर में जीविका के सहयोग से आत्मनिर्भर बनीं कुसुम देवी, किराना दुकान से संवारा भविष्य

HighLights

  1. कुसुम देवी ने जीविका से जुड़कर आर्थिक सहायता प्राप्त की।

  2. 20 हजार रुपये से किराना दुकान शुरू कर आत्मनिर्भर बनीं।

  3. मासिक 4 हजार रुपये आय से परिवार की स्थिति सुधारी।

जागरण संवाददाता, बक्सर। जिले के डुमरांव प्रखंड अंतर्गत कसिया गांव की कुसुम देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल है। आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे परिवार को संभालने के लिए कभी पति-पत्नी दोनों को दिहाड़ी मजदूरी करना पड़ता था।

परिवार के पास अपना घर भी नहीं था और दूसरे के घर में रहकर जीवन-यापन करना पड़ता था। आज वही कुसुम देवी किराना दुकान का सफलतापूर्वक संचालन कर परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

कुसुम देवी के परिवार में पति-पत्नी, एक पुत्र और एक पुत्री सहित कुल चार सदस्य हैं। जीविका से जुड़ने से पहले परिवार की आमदनी का प्रमुख स्रोत दिहाड़ी मजदूरी थी। मजदूरी का काम नियमित नहीं मिलने के कारण आमदनी भी अनिश्चित रहती थी।

सीमित संसाधनों के कारण परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी आवश्यकताओं को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण था। इसी बीच कुसुम देवी जीविका से जुड़ीं और दुर्गा स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें नियमित बचत, वित्तीय अनुशासन और आजीविका के अवसरों की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला और परिवार की स्थिति बदलने का आत्मविश्वास भी पैदा हुआ।

जीविका से जुड़ने के बाद कुसुम देवी को एसजेवाई योजना के तहत 20 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। उन्होंने इस राशि का उपयोग घरेलू खर्च में करने के बजाय स्थायी आय का साधन विकसित करने में किया।

प्राप्त सहायता से उन्होंने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की। किराना दुकान शुरू होने के बाद कुसुम देवी की आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। वर्तमान में वह अपनी दुकान का संचालन स्वयं कर रही हैं और इससे करीब चार हजार रुपये प्रतिमाह की आय अर्जित कर रही हैं।

कुसुम देवी के लिए किराना दुकान केवल आमदनी का जरिया नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मविश्वास और आर्थिक निर्णयों में बढ़ती भागीदारी का प्रतीक भी बन चुकी है।

कभी दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर रहने वाला परिवार अब आय के अपने साधन की ओर बढ़ रहा है। कुसुम देवी की यह सफलता आसपास की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।

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