विवाह के शुभ मुहूर्तों पर लगने वाला है ब्रेक, 14 मई के बाद एक महीने तक नहीं बजेंगी शहनाइयां
बक्सर में 14 मई के बाद विवाह के शुभ मुहूर्त एक महीने के लिए रुक जाएंगे, ज्येष्ठ अधिकमास के कारण 17 मई से 15 जून तक कोई शादी नहीं होगी। ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड तस्वीर
HighLights
14 मई के बाद एक माह तक विवाह मुहूर्त नहीं।
ज्येष्ठ अधिकमास, गुरु अस्त, चातुर्मास से शुभ कार्य वर्जित।
19 जून और 20 नवंबर से पुनः विवाह समारोह होंगे।
गिरधारी अग्रवाल, बक्सर। शादी-विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए अब केवल एक दिन का ही शुभ मुहूर्त शेष रह गया है। 14 मई के बाद विवाह समारोहों की शहनाई लगभग एक माह तक शांत हो जाएगी।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 17 मई से ज्येष्ठ अधिकमास आरंभ हो रहा है, जिसके चलते विवाह, सगाई, गृह प्रवेश समेत सभी शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। यह अधिकमास 15 जून तक रहेगा।
19 जून से पुनः विवाह योग्य शुभ लग्न मुहूर्त आरंभ
आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री (साहेब पंडित) ने बताया कि इस वर्ष ज्येष्ठ मास दो माह का पड़ रहा है। 17 मई से प्रारंभ हो रहा ज्येष्ठ अधिकमास 15 जून को समाप्त होगा। इसके बाद 19 जून से पुनः विवाह योग्य शुभ लग्न मुहूर्त आरंभ होंगे।
जून माह में 19, 20, 21, 27, 28 और 29 जून को विवाह के उत्तम मुहूर्त उपलब्ध हैं। वहीं जुलाई में 1, 2, 6, 7, 8, 11 एवं 12 जुलाई को वैवाहिक लग्न रहेंगे। आचार्य के अनुसार इसके बाद लंबे समय तक ऐसे शुभ नक्षत्र नहीं मिल रहे हैं, जिनमें विवाह जैसे मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकें।
ग्रह की शुभ शक्ति क्षीण
उन्होंने बताया कि 15 जुलाई को देवगुरु बृहस्पति पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएंगे। ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का संबंध विवाह, संतान, भाग्य, धन, ज्ञान और धर्म से माना जाता है। गुरु के अस्त होने की अवधि में विवाह, सगाई और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं, क्योंकि इस दौरान ग्रह की शुभ शक्ति क्षीण हो जाती है।
इसके अतिरिक्त 25 जुलाई को हरिशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास आरंभ हो जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं। सनातन परंपरा में सभी मांगलिक कार्यों में भगवान विष्णु एवं अन्य देवी-देवताओं का आह्वान आवश्यक माना गया है।
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इसलिए चातुर्मास के दौरान विवाह एवं अन्य शुभ संस्कार नहीं किए जाते। अब 20 नवंबर को प्रबोधिनी एकादशी के बाद ही पुनः विवाह समारोहों की रौनक लौटेगी और वर-वधू के आंगन में मंगल गीत गूंजेंगे।