रामायण सर्किट स्पेशल ट्रेन बक्सर पहुंची; रामरेखा घाट पर श्रद्धालुओं ने किया रामेश्वरनाथ शिवलिंग का पूजन
भारतीय रेलवे की 'श्री रामायण यात्रा' स्पेशल ट्रेन तीर्थयात्रियों को लेकर बक्सर पहुंची। जनकपुर से लौटे श्रद्धालुओं ने रामरेखा घाट पर गंगा स्नान कर रामे ...और पढ़ें

रामेश्वरनाथ मंदिर के सामने खड़ा यात्रियों का जत्था। जागरण
HighLights
श्री रामायण यात्रा ट्रेन बक्सर पहुंची, तीर्थयात्री उत्साहित।
रामरेखा घाट पर गंगा स्नान, रामेश्वरनाथ शिवलिंग का पूजन।
जनकपुर से लौटे श्रद्धालुओं ने बक्सर में किया आध्यात्मिक दर्शन।
जागरण संवाददाता, बक्सर। भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी ‘श्री रामायण यात्रा’ स्पेशल ट्रेन अपने निर्धारित पड़ाव के तहत तीर्थयात्रियों को लेकर महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि बक्सर पहुंची।
नेपाल के जनकपुर माता सीता की जन्मस्थली के दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं ने यहां आकर आस्था की डोर को और मजबूत किया।
रेलवे स्टेशन पर ठहराव के बाद श्रद्धालु अल सुबह ई रिक्शा से रामरेखा घाट पहुंचे। यहां उन्होंने गंगा स्नान व दान-पुण्य कर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित माने जाने वाले रामेश्वरनाथ शिवलिंग का विधिवत पूजन किया।
50 श्रद्धालुओं का जत्था है तीर्थ यात्रा में शामिल
लगभग 50 श्रद्धालुओं का यह जत्था नई दिल्ली से अयोध्या होते हुए जनकपुर समेत कई धार्मिक स्थलों का दर्शन कर इस पावन नगरी में पहुंचा।
यह यात्रा प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रमुख स्थलों के दर्शन कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। वातानुकूलित कोच, शुद्ध शाकाहारी भोजन और भजन-कीर्तन की सुविधा से सुसज्जित यह ट्रेन श्रद्धालुओं के लिए सचमुच ‘चलता-फिरता तीर्थ’ बन गई है। बक्सर प्रवास के दौरान यात्रियों ने सिद्धाश्रम और गंगा तट का भी दर्शन किया।
रिश्तों की गर्माहट और भक्ति का संगम, सफर बना भावनात्मक अनुभव
इस यात्रा का सबसे भावुक दृश्य तब सामने आया जब स्टेशन पर उतरे यात्रियों के बीच रिश्तों के अलग-अलग रंग दिखाई दिए।
दिल्ली के विजय मेहता अपनी पत्नी लक्ष्मी मेहता के साथ इस आध्यात्मिक यात्रा का आनंद लेते नजर आए, वहीं लखनऊ के राजेंद्र वर्मा और जितेंद्र वर्मा भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए साथ-साथ भक्ति पथ पर अग्रसर दिखे।
कुछ श्रद्धालु ऐसे भी थे, जिन्होंने यह यात्रा अकेले शुरू की, लेकिन यहां पहुंचते-पहुंचते वे एक बड़े परिवार का हिस्सा बन चुके थे।
फरीदाबाद के 80 वर्षीय महेश तिवारी की कहानी ने सभी को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि बेटे के शहीद होने और पत्नी के निधन के बाद वे अकेले हो गए थे। लेकिन इस यात्रा ने उन्हें फिर से अपनापन दिया।
यात्रियों का कहना था—“भगवान राम की शरण में कोई अकेला नहीं होता, पूरी ट्रेन ही हमारा परिवार बन गई है।”
श्रद्धालुओं ने साझा किए दिव्य अनुभव
- “जनकपुर के जानकी मंदिर में दर्शन अलौकिक अनुभव रहा। ऐसा लगा जैसे त्रेता युग में पहुंच गए हों।” — लक्ष्मी मेहता
- “रेलवे की यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सुरक्षा और सुविधा ने यात्रा को सहज बना दिया।” — जितेंद्र कुमार वर्मा, लखनऊ
- “यह यात्रा उत्तर भारत और नेपाल के सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत कर रही है।” — संजय चाटे
- “बक्सर पहुंचकर विश्वामित्र आश्रम, रामेश्वरनाथ मंदिर और रामरेखा घाट के दर्शन कर आध्यात्मिक संतोष मिला।” — हिमांशु भट्ट
गाइडों से जानी बक्सर की पौराणिक महत्ता
बक्सर पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने महर्षि विश्वामित्र आश्रम और रामेश्वरनाथ मंदिर का दर्शन किया। स्थानीय गाइडों ने उन्हें इस क्षेत्र के पौराणिक और धार्मिक महत्व से अवगत कराया।
गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने रामरेखा घाट पर पूजा-अर्चना की और अपनी यात्रा को सार्थक बनाया।