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    कभी कच्छा-बनियान, कभी बीड़ी छोड़वा... अब बलकटवा गैंग ने बढ़ाई दरभंगा की चिंता

    Updated: Sun, 19 Jul 2026 06:12 PM (GMT+05:30)

    दरभंगा में कच्छा-बनियान, बीड़ी छोड़वा और गुलेल जैसे विभिन्न गिरोहों ने आतंक मचाया है, जिनकी आपराधिक गतिविधियों का इतिहास रहा है। अब 'बलकटवा' गैंग ने ब ...और पढ़ें

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

    इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है। (फोटो-AI)

    जागरण संवाददाता, दरभंगा । सीतामढ़ी, मधुबनी, रक्सौल, दरभंगा...ये जिले अलग-अलग दौर में डकैत गिरोहों के खौफ में रहे हैं। सीमावर्ती रक्सौल, मधुबनी, सीतामढ़ी और दरभंगा में तो नेपाल के डकैतों ने भी वारदात को अंजाम दिया।

    डकैतों का अलग-अलग समूह होता था, जो डकैती की खास शैली और रंग-ढंग से अपनी पहचान व खौफ स्थापित करते थे। कच्छा-बनियान वाले इसी तरह के पहनावे में आते थे।

    माना जाता था कि चुस्त-दुरुस्त डकैत घटना के बाद भागने के लिए कम कपड़े पहनते थे। चेहरे को पारदर्शी कपड़े से बांध लेते थे, ताकि पहचान न हो। पकड़ में न आने पाएं, इसलिए फिसलन के लिए शरीर और हाथ-पैरों पर तेल या चिकनी मिट्टी लगा लेते थे।

    2014-15 में जाले, कमतौल और सदर थानाक्षेत्र में इस तरह के गिरोह ने कई घटनाओं को अंजाम दिया। काफी मशक्कत बाद जब बदमाशों को पकड़ा गया तो पता चला सभी घुमंतू लोग हैं, जो दिन में मांगने का काम करते थे और रात में वारदात को अंजाम देते थे।

    नेपाली डकैतों का सदर, केवटी आदि सीमावर्ती इलाकों में खौफ रहा। यह स्थानीय लोगों से नजदीकी स्थापित कर रेकी कराकर ढाई वर्ष में आठ घटनाओं को अंजाम दिया है। इसी तरह से बीड़ी छोड़वा गिरोह ने 2017 में पुलिस को नाको दम कर दिया था।

    सिमरी, मब्बी, केवटी, कमतौल, सिंहवाड़ा और विषनपुर क्षेत्र में वारदात को अंजाम देने के बाद गिरोह के सदस्य बीड़ी के बंडल और माचिस को छोड़कर चले जाते थे।

    पुलिस ने तकनीकी सेल की मदद से इस गिरोह का भी पर्दाफाश किया। इसी तरह से शटरकटवा गिरोह, गुलेल गिरोह से भी लोग परेशान बने रहे। लेकिन, अब बलकटवा गैंग से आम लोग ही नहीं, पुलिस भी परेशान हैं।

    बहादुरपुर थानाक्षेत्र के डरहार गांव में आठ जुलाई और 16 जुलाई की रात घटी घटना से लोग दहशत में हैं। घटना का दोनों दिन गुरुवार था। पहले दिन चिकित्सक डाक्टर पवन कुमार मिश्रा की बहू करिश्मा कुमारी को बदमाशों ने मारपीट कर जख्मी कर दिया।

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    हाथ-पांव बांध दिए। फिर इंजेक्शन देकर बेहोश कर दिया। इसके बाद चाकू से बाल काट दिए। इसके बाद पांच लाख से अधिक की डकैती कर बदमाश फरार हो गए।

    इस मामले का पुलिस पर्दाफाश कर पाती उससे पहले दूसरे गुरुवार को फिर से इस तरह की घटनाएं गांव में घट गई। शिक्षक सुमन चौधरी के घर इंजेक्शन की जगह बदमाश स्प्रे लेकर पहुंचे थे। लेकिन, पहली घटना की तरह की शिक्षक की पुत्री आकांक्षा के बाल को कैंची से काट दिया गया।

    गुलेल गिरोह के बाद बलकटवा का सामना

    दरभंगा जिले में 2022 में गुलेल गिरोह ने तांडव मचा दिया था। हालांकि, लगातार कई घटनाओं को अंजाम देकर यह गिरोह अचानक से वारदात को अंजाम देना बंद कर दिया।

    यह मामला लहेरियासराय थाना क्षेत्र के बलभद्रपुर मोहल्ले में दो सितंबर 2022 की रात डाक्टर रजनीश कुमार के घर घटी घटना का जब सीसी फुटेज सामने आया तो उसे देख पुलिस वाले भी दंग रह गए। इस गिरोह के बदमाश के बदन पर चड्डी और हथियार के रूप में गुलेल पाया गया।

    बलकटवा से पहले चोटी कटवा गिरोह का था दहशत

    चोटी कटवा गिरोह का दहशत 2017 में पूरे देश में था। हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश और राजस्थान के बाद बिहार के अलग-अलग जिले में महिलाओं के अचानक चोटी कट जाने की घटनाएं घटने लगी थीं।

    उस दौरान महिलाएं इस कदर डर गई थीं कि घर से बाहर निकलने से पहले अपना सिर ढक लिया करती थीं। उस दौरान दरभंगा के सिंहवाड़ा, जाले, फकेल, मोरो थानाक्षेत्र में शक के दायरे में आई कई मानसिक रूप से बीमार महिलाओं की धुनाई कर दी गई थी।

    आठ अगस्त 2017 को बेंता ओपी स्थित अल्लपट्टी चौक निवासी वृद्ध घनश्यामपुर थाना क्षेत्र के सिमरी भगरस गांव निवासी मो. युनूस का इलाज कराने के लिए उनके पुत्र नूर आलम पारस अस्पताल लेकर आए थे।

    वे पर्ची कटा रहे थे, इसी बीच उनके पिता बगल स्थित उपेन्द्र राम के घर चले गए। लोगों ने अनजान वृद्ध को देख चोटी कटवा समझकर धुनाई कर दी थी।

    धोईघाट के पास एक वृद्ध महिला को लोगों ने जमकर धुनाई कर दी थी। वृद्ध महिला बिथान थाना क्षेत्र की रहने वाली थी, जो भटक कर आ गई थी।