मिथिलांचल के गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी, 3 दशक बाद फिर शुरू हो रहीं रैयाम और सकरी चीनी मिलें
उत्तर बिहार की रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे हजारों गन्ना किसानों में नई उम्मीद जगी है। ...और पढ़ें

3 दशक बाद फिर शुरू हो रहीं रैयाम और सकरी चीनी मिलें (AI Generated Image)
HighLights
रैयाम और सकरी चीनी मिलों के पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू।
सहकारिता विभाग ने गन्ना किसानों के लिए सदस्यता अभियान चलाया।
मिलों के खुलने से हजारों किसानों को मिलेगा रोजगार और लाभ।
संवाद सहयोगी, केवटी। उत्तर बिहार के किसानों की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली जिले की रैयाम और मधुबनी जिले की सकरी चीनी मिलों के दिन अब बहुरने वाले हैं। करीब तीन दशक से बंद पड़ी इन दोनों मिलों को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया अब धरातल पर उतर चुकी है। सहकारिता विभाग द्वारा इस दिशा में मील का पत्थर माने जा रहे 'सदस्यता अभियान' की शुरुआत कर दी गई है।
प्रस्तावित प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों से जुड़ने के लिए इच्छुक गन्ना उत्पादक किसान 30 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। जून 2026 में सरकार को सौंपी गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के बाद अब किसानों को इस मुहिम का हिस्सा बनाकर मिलों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है। इस पहल से इलाके के हजारों गन्ना किसानों में नई उम्मीद जगी है।
सदस्य बनने के लिए पात्रता की शर्तें:
सहकारिता विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, समिति की सदस्यता के लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। किसान संबंधित चीनी मिल के कमांड क्षेत्र का निवासी हो। किसान वर्तमान में गन्ने की खेती कर रहा हो या अगले दो पेराई सत्रों में गन्ना उत्पादन का संकल्प ले।
सामान्य वर्ग के किसानों के पास कम से कम एक हेक्टेयर (लगभग 2.5 एकड़) और आरक्षित वर्ग के किसानों के लिए न्यूनतम 50 डिसमिल कृषि भूमि होना अनिवार्य है। एक परिवार से केवल एक ही सदस्य को सदस्यता दी जाएगी।
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ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन की सुविधा:
किसान सदस्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा ऑफलाइन आवेदन की सुविधा भी दी गई है। किसी भी प्रकार की सहायता के लिए किसान अपने स्थानीय पैक्स, प्रखंड स्तरीय आयोजक समिति अथवा विभाग की ओर से जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
सहकारी मॉडल से बदलेगी आर्थिक सूरत
दरभंगा के वरीय सहकारिता पदाधिकारी हर्षवर्द्धन ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य गन्ना किसानों को दोबारा खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। सदस्यता अभियान पूरा होने के बाद सरकार के पास पंजीकृत किसानों और गन्ना क्षेत्र का सटीक आंकड़ा उपलब्ध होगा, जिसके आधार पर उन्हें उन्नत बीज, खाद और तकनीकी सहायता दी जाएगी।
सरकार इन मिलों को ओडिशा और गुजरात के सफल सहकारी मॉडल पर पुनर्जीवित कर रही है, जिससे आगामी एक से दो वर्षों के भीतर मिलों में उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
तीन दशकों का सूखा होगा खत्म:
तकनीकी खामियों, प्रशासनिक कुप्रबंधन और भुगतान में देरी के कारण सकरी चीनी मिल 1993-96 के बीच और बेहतरीन क्वालिटी की चीनी के लिए मशहूर रैयाम चीनी मिल 1994 से पूरी तरह ठप पड़ी थी।
अब इन मिलों के दोबारा शुरू होने से न सिर्फ दरभंगा और मधुबनी, बल्कि समस्तीपुर और सीतामढ़ी के सीमावर्ती क्षेत्रों की भी आर्थिक सूरत बदलेगी और बड़े पैमाने पर स्थानीय रोजगार का सृजन होगा।